जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (फोटो: यूट्यूब)
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को आवास खाली कराने के लिए पत्र लिखने के एक महीने बाद पूर्व सीजेआई जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने मुख्य न्यायाधीश के तौर पर आबंटित बंगले को शुक्रवार को खाली कर दिया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस देरी के पीछे कुछ व्यक्तिगत कारण बताए थे और कहा था कि इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट प्रशासन और मुख्य न्यायाधीशों को सूचित किया गया था।
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने एक बयान में बताया था कि बंगला न खाली कर पाने के पीछे उनके व्यक्तिगत कारण थे। उन्होंने कहा था कि इसके बारे में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन और उस समय मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव खन्ना को सूचित किया था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि वे खुद इस सरकारी बंगले में समय सीमा से ज्यादा नहीं रहना चाहता थे, लेकिन ऐसा करना उनकी मजबूरी थी। उनकी बेटियों को कुछ खास सुविधाओं वाले घर की जरूरत थी, जो नहीं मिल पा रहा था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 28 अप्रैल को वर्तमान CJI बीआर गवई को फोन पर कर कहा था कि उन्हें एक नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है और उसकी मरम्मत चल रही है। उन्होंने कहा था कि यह मकान दो साल तक बेकार पड़ा था। ठेकेदार का कहना है कि 30 जून तक इसकी मरम्मत कर दी जाएगी।
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जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को अपने पद से रिटायर हो गए थे। लेकिन पद छोड़ने के लगभग आठ महीने बाद भी भारत के मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में रह रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर जस्टिस चंद्रचूड़ से बंगला खाली कराने का अनुरोध किया था। जस्टिज चंद्रचूड़ के बाद मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल मात्र 6 महीने का था, इसलिए उन्होंने CJI के अधिकारिक आवास में नहीं रहने का विकल्प चुना था। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने भी पहले से आवंटित बंगले में ही रह रहे हैं।