राष्ट्रपति के सवालों पर सुनवाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंशियल रेफ़रेंस पर सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि संविधान सभा ने पूरी सोच-समझकर राष्ट्रपति और राज्यपालों पर कोई निश्चित समयसीमा नहीं लगाई। उन्होंने कोर्ट को बताया कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने स्वयं वह संशोधन पेश किया था, जिसमें पहले से तय छह हफ़्तों की समयसीमा को हटाकर केवल यह शब्द जोड़े गए “जितनी जल्दी हो सके” (as soon as possible)।
तुषार मेहता ने संविधान सभा में हुई बहस का हवाला देते हुए कहा कि शुरू में राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए 6 महीने की समय सीमा तय की गई थी जिसे संविधान सभा के सलाहकार सदस्य डॉ बीएन राव ने सुझाया था। लेकिन डॉ बीआर अंबेडकर इसके खिलाफ थे। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा था कि राष्ट्रपति को इस तरह बाँधना उचित नहीं होगा और यह समयसीमा हटा दी गई और छह हफ़्तों की समयसीमा को हटाकर “जितनी जल्दी हो सके” जोड़ा गया। संविधान सभा के दूसरे सदस्य एच वी कामथ ने इस संशोधन का विरोध किया था और कहा था कि “as soon as possible” शब्द बहुत अस्पष्ट हैं और राष्ट्रपति हमेशा आदर्श तरीके से काम करें, यह मान लेना ठीक नहीं है। फिर भी डॉ अंबेडकर का संशोधन पास हो गया।
सॉलिसिटर जनरल की इस दलील पर सीजेआई जस्टिस गवई ने कहा कि संविधान सभा की बहस से तो यही प्रतीत होता है कि बिल पर निर्णय उचित समय के भीतर होना चाहिए। कुछ सदस्यों ने तो यहां तक कहा था कि छह हफ़्ते की समयसीमा भी ज़्यादा लंबी है। इस पर एसजी मेहता ने कहा कि “राष्ट्रपति को बाँधना नहीं चाहिए, यही उस समय की सोच थी। राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसे उच्च पदों पर बैठे लोग क़ानून और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुसार ही काम करेंगे।”
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चीफ जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 8 अप्रैल 2025 के अपने फैसले में किसी विधेयक पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए समयसीमा तय की थी। उसके बाद राष्ट्रपति ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस के जरिए सुप्रीम कोर्ट से 14 सवालों पर राय मांगी थी। उसमें से एक सवाल ये भी था कि अगर संविधान में राज्यपाल और राष्ट्रपति के फैसले लेने का समय और तरीका तय नहीं किया गया है, तो क्या अदालत अपने आदेश से समय सीमा और तरीका तय कर सकती है? बुधवार को सुनवाई जारी रहेगी।