सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बेल एम त्रिवेदी के रिटायरमेंट के समय सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने फेयरवेल नहीं दिया। इसपर खूब चर्चा हुई थी। कुछ ने वकीलों की आलोचना की थी तो कुछ को जस्टिस त्रिवेदी की आलोचना का मौक़ा मिल गया था।
जज के रिटायरमेंट के आख़िरी दिन कुछ समय के लिए कोर्ट नंबर एक यानि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की कोर्ट में सेरेमोनियल बेंच बैठती है और मुख्य न्यायाधीश रिटायर हो रहे जज को अपने साथ बैठाते हैं। उस समय सुप्रीम कोर्ट के कुछ सीनियर एडवोकेट उस जज के बारे में अच्छी अच्छी बातें करते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। उसमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी होते हैं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश साथी जज के बारे में अच्छी बातें बोलते हैं इसके बाद वह सेरेमोनियल बेंच उठ जाती है। उसके थोड़ी देर बाद CJI की कोर्ट में नियमित कार्यवाही शुरू हो जाती है।
सेरेमोनियल बेंच के अलावा रिटायर होने वाले जज के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट में एक और परम्परा निभाई जाती है। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संगठन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन फेयरवेल कार्यक्रम रखता है। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के सभी जज और बार के तमाम पदाधिकारी रिटायर होने वाले जज के बारे में अपने उद्गार व्यक्त करते हैं। रिटायर हो रहे जज भी अपना अनुभव इत्यादि बताकर विदा लेते हैं। इस फेयरवेल कार्यक्रम में रिटायर हो रहे जज के परिवार वाले भी शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम में कुछ खाने पीने की व्यवस्था भी की जाती है।
जस्टिस बेला त्रिवेदी के लिए सेरेमोनियल बेंच की परंपरा निभाई गई। सेरेमोनियल बेंच में जस्टिस बेला त्रिवेदी के साथ CJI जस्टिस गवई और जस्टिस मसीह बैठे थे। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई ने जस्टिस बेला त्रिवेदी को शानदार जज बताया। अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल सहित तमाम लोगों ने अच्छी बातें की। लेकिन मुख्य न्यायाधीश इस बात से दुःखी थे कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस बेला त्रिवेदी के लिए फेयरवेल कार्यक्रम नहीं करने का फैसला किया था।
जस्टिस गवई ने कहा कि अलग-अलग तरह के जज होते हैं। जस्टिस त्रिवेदी ने अपने पूरे जज के करियर में स्पष्टता के साथ बात रखी। बिना किसी भय के फैसले दिए और खूब मेहनत की। वह सुप्रीम कोर्ट की एकता और अखंडता में यकीन रखने वाली जज रही हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जो स्टैंड लिया है, वह सही नहीं है। मैं खुलकर बात करने वाला व्यक्ति हूं, इसलिए स्पष्ट कह रहा हूं कि यह गलत है। उन्होंने कहा कि बेंच के सामने फुल हाउस की मौजूदगी बताती है कि फैसला सही है। जस्टिस बेला त्रिवेदी एक शानदार जज रही हैं।’ जस्टिस मसीह ने अपनी स्पीच में कहा कि जस्टिस त्रिवेदी को बार एसोसिएशन द्वारा विदाई दी जानी चाहिए थी। उन्होंने जस्टिस त्रिवेदी द्वारा जज के रूप में दिखाए गए स्नेह की भी सराहना की।
सेरेमोनियल बेंच के सामने जब CJI ये सब बोल रहे थे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और वाइस प्रेसिडेंट रचना श्रीवास्तव मौजूद थी। जस्टिस गवई ने उनकी मौजूदगी की तारीफ की। लेकिन CJI बार एसोसिएशन के रवैए से असंतुष्ट थे।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने क्यों नहीं दिया फेयरवेल
जस्टिस बेला त्रिवेदी के रिटायरमेंट पर फेयरवेल आयोजित नहीं करने की कई वजहें बताई जा रही है। उनमें पहला है कोर्ट में उनका सख्त अनुशासन और नियमों के प्रति कठोर होना। बार के मेंबर यानी वकील उनकी सख्ती से परेशान थे। जस्टिस त्रिवेदी नियमों के मामले में पाबंद थीं। जैसे सामान्यतया किसी केस में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सुनवाई के समय कोर्ट में मौजूद रहे इसकी जरूरत नहीं होती है। लेकिन जस्टिस त्रिवेदी के सामने मामला आता था तो पहले पूछती थीं कि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड कौन है और कहां है ! अगर कोर्ट में नहीं है तो क्यों नहीं है! एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, वो वकील होता है जिसके नाम से केस दाखिल होता है। बहस कोई और वकील करता है। इसके अलावा वकीलों को उनसे एक और दिक्कत थी। किसी भी केस में एक से अधिक वकील अपनी हाजिरी लगाना चाहते हैं। और कोर्ट अपने ऑर्डर में उनका नाम लिखाता भी है। लेकिन जस्टिस त्रिवेदी अपने ऑर्डर में केवल उन वकीलों का नाम लिखातीं थीं जो बहस करते थे या जिनके नाम से वकालतनामा होता था।
Justice Bela M. Trivedi retired today. Known for a prosecution-oriented approach, she often trusted law enforcement over presumption of innocence. Her judicial approach frequently favored incarceration over granting bail, treating jail as the norm and bail as a rare exception. pic.twitter.com/eS5wsViPV7
— Paras Nath Singh (@parasnsingh95) June 9, 2025
इसके अलावा एक और घटना है जिससे बार के मेंबर नाराज़ थे। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में फर्जी केस दायर हुआ। जिसके नाम से केस दायर हुआ था उसे पता ही नहीं था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों की मिली भगत की आशंका थी। मामला जस्टिस त्रिवेदी के सामने आया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वकील चाहते थे कि इंटरनल जांच करके मामले को रफा दफा कर दिया जाए। लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी ने बार एसोसिएशन के अनुरोध को नकार दिया। सीबीआई जांच का आदेश दे दिया।
जजों ने भी एक परंपरा तोड़ी थी!
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने एक परम्परा तोड़ा था। यह बात साथी जजों को पसंद नहीं आई थी। उन्होंने भी एक परंपरा तोड़ा, लेकिन ये कदम जस्टिस बेला त्रिवेदी को अतिरिक्त सम्मान देने के लिए किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में एक परंपरा रही है कि जब भी कोई जज सेवानिवृत्त होता है, सभी साथी जज अपने अपने चैम्बर से निकलकर प्रोर्टिगो में इकट्ठा होते हैं। रिटायर होने वाले जज अपने चैंबर से निकल कर आते हैं और साथी जज उनको विदा करते हैं।
आइए, जस्टिस बेला त्रिवेदी के रिटायरमेंट के दिन से जुड़ी एक और रोचक बात बताता हूं।
सुप्रीम कोर्ट में एक परंपरा रही है कि जब भी कोई जज सेवानिवृत्त होता है, सभी साथी जज अपने अपने चैम्बर से निकलकर प्रोर्टिगो में इकट्ठा होते हैं। रिटायर होने वाले जज अपने चैंबर से निकल कर आते हैं और… pic.twitter.com/WIP8cFgEB5
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) May 18, 2025
लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी के लिए CJI गवई ने उस परंपरा को तोड़कर खुद जस्टिस त्रिवेदी के चैंबर तक गए, साथी जज भी साथ गए। उनको साथ लेकर आए और फिर प्रथा के अनुसार उनको गॉर्ड ऑफ हॉनर दिया गया। जस्टिस बेला त्रिवेदी कार में बैठीं और साथी जजों ने प्रतीकात्मक रूप से उस कार को धक्का लगाकर जस्टिस बेला त्रिवेदी को विदा किया।
जस्टिस बेला त्रिवेदी को फेयरवेल न देने के पीछे कारण चाहे जो भी हो, सुप्रीम कोर्ट की एक वर्षों पुरानी परम्पर टूटी है। इस परंपरा के टूटने से सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज भी आहत थे। अगर आने वाले समय में कुछ और जज भी रिटायर होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट के अन्य रिटायर होने वाले जजों ने बार एसोसिएशन से फेयरवेल नहीं लेने का फैसला लिया तब क्या होगा! कुछ परंपरा बचाए जाने योग्य होती हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों रिटायर होने पर विदाई समारोह का आयोजन एक ऐसी ही परंपरा है।