लापरवाही से गाड़ी चलाते समय, खुद की गलती से मरने वालों के परिजनों को दुर्घटना बीमा का भुगतान करने के लिए बीमा कम्पनियां बाध्य नहीं। ये अहम फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीड़ित परिवार उस स्थिति में बीमा कंपनी से भुगतान की मांग नहीं कर सकता, जब हादसा बगैर किसी बाहरी वजह के, मृतक ड्राइवर की गलती से ही हुआ हो।
साल 2014 की बात है। एनएस रविश अपनी कार फिएट लीनिया से कर्नाटक के एक गांव मल्लासांद्रा गांव से अरासिकरे टाउन जा रहे थे। कार में उनके पिता, बहन और बच्चे भी बैठे हुए थे। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक रविश लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे। उनकी गाड़ी की रफ्तार बहुत तेज थी। गाड़ी से उनका नियंत्रण खो गया और गाड़ी पलट गई। रविश ने मैलानाहल्लीके पास गाड़ी का नियंत्रण खोने से पहले ट्रैफिक नियम भी तोड़े थे।
उस हादसे में रविश की मौत हो गई। उनकी पत्नी, बेटा और माता-पिता 80 लाख रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और दावा किया कि रविश की लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हादसा हुआ। मोटर एक्सीडेंटल ट्रिब्यूनल ने रविश के परिवार वालों का दावा खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, उसमें कुछ नया नहीं है! इंश्योरेंस क्लेम के समय ये साबित करना होता है कि दुर्घटना मृतक व्यक्ति की लापरवाही से तो नहीं हुई थी!
इस केस में पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक मृतक लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे। उनकी गाड़ी की रफ्तार बहुत तेज थी। गाड़ी से… https://t.co/2Ayq3m56My— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) July 3, 2025
मोटर एक्सीडेंटल ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ एनएस रविश के घरवालों ने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका दावा था कि हादसा टायर फटने के कारण हुआ था। हाईकोट कोर्ट ने कहा कि जब मृतक के कानूनी प्रतिनिधि की तरफ से दावा किया जाता है, तो यह साबित किया जाना जरूरी है कि मृतक लापरवाही से तो गाड़ी नहीं चला रहा था। साथ ही यह भी साबित किया जाना जरूरी है कि मृतक पॉलिसी में कवर हो ताकि बीमा कंपनी कानूनी हकदारों को भुगतान करे। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में, दुर्घटना तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई जिसके लिए मृतक खुद जिम्मेदार है। इसलिए उसके कानूनी उत्तराधिकारी, मुआवजे के लिए दावा नहीं कर सकते।
अपील सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए रविश के परिवार को रहत देने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मृतक के घर वाले, उस स्थिति में बीमा कंपनी से भुगतान की माँग नहीं कर सकते, जब हादसा बगैर किसी बाहरी वजह के, खुद मरने वाले की गलती से ही हुआ हो।
ये ख़बर रफ्तार के शौकीनों और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के लिए सूचना भी है और चेतावानी भी। गाड़ी सावधानी से चलाएं, सुरक्षित रहें और अपने परिवार को मुश्किल में न डालें।