जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (फोटो: यूट्यूब)
सुप्रीम कोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर पूर्व CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से शीघ्र सरकारी बंगला खाली कराने को कहा है। कृष्ण मेनन मार्ग का बंगला नंबर 5, CJI को मिलता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस बंगले को अभी तक खाली नहीं किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर, 2024 को सेवानिवृत्त हुए थे। नियम के मुताबिक जस्टिस चंद्रचूड़ 10 मई, 2025 मुख्य न्यायाधीश के लिए आबंटित बंगले से रह सकते थे।
2022 में बनाए गए नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को सेवानिवृत्ति के बाद छह महीने तक टाइप VII आवास (थोड़ा छोटा घर) में रहने की अनुमति है। लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ टाइप VIII बंगले में रह रहे थे, जो आमतौर पर कार्यरत मुख्य न्यायाधीशों के लिए होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने सेवानिवृत्त होने के ठीक एक महीने बाद 18 दिसंबर, 2024 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को पत्र लिखकर 30 अप्रैल, 2025 तक 5, कृष्ण मेनन मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास में रहने की अनुमति मांगी थी।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने बाद के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से जून तक इस बंगले में रहने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन की चिट्ठी पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपनी बेटी के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा कि हम एक घर की तलाश कर रहे थे, क्योंकि हमारी बेटियां विशेष ज़रूरतों वाली हैं। हमने अपनी बड़ी बेटी के लिए आईसीयू जैसा सेटअप बनाया है, और इसलिए खुले बाज़ार में हमारी ज़रूरतों के हिसाब से घर ढूंढना मुश्किल है। इसलिए, मैंने सरकार से किराए पर अस्थायी आवास देने का अनुरोध किया था, मरम्मत पूरी होते ही वहां चले जाएंगे।
सीजेआई के पद से रिटायर होने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के छात्रों को क़ानून पढ़ा रहे हैं। यहां उन्होंने विशिष्ट प्रोफेसर ( distinguished professor) के तौर पर ज्वाइन किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ की दो बेटियां हैं जिन्हें उन्होंने बच्चियों को गोद लिया है। दोनों स्पेशल चाइल्ड हैं। एक का नाम माही और दूसरे का नाम प्रियंका है। जस्टिस चंद्रचूड़ की पहली पत्नी का नाम रश्मि था। उनकी मौत साल 2007 में कैंसर से हो गयी थी। उसके बाद उन्होंने कल्पना दास से दूसरी शादी की है। जस्टिस चंद्रचूड़ को पहली पत्नी से दो बेटे हैं। एक का नाम अभिनव और दूसरे का नाम चिंतन है। पिता और दादा की तरह दोनों बेटे भी कानून के पेशे से ही जुड़े हैं।