टाइम्स ऑफ इंडिया में गृहमंत्री अमित शाह का इंटरव्यू छपा था। सवाल पूछा गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा को जज के कुर्सी से हटाने को लेकर सरकार जितना उत्सुक है, क्या जस्टिस शेखर यादव के मामले में भी उतनी ही उत्सुक होगी?
गृहमंत्री का जवाब था : यशवंत वर्मा का मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है! जस्टिस शेखर यादव का मामला जज के आचरण ( conduct of a judge) से जुड़ा है! दोनों में अंतर है। एक भ्रष्टाचार का मामला है दूसरा अनुचित आचरण का, और दोनों बिल्कुल अलग है। जज के अनुचित आचरण के मामले में सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना होता है, इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
मामला चाहे भ्रष्टाचार का हो या जज के अनुचित आचरण का, संविधान दोनों में कोई भेद नहीं करता। दोनों स्थितियों में जज को हटाने की प्रक्रिया और कार्यवाही एक है। जजों की हटाने की क्या है व्यवस्था समझिए: