सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी रहे, इसके लिए लोगों को इसका मूल्य समझना होगा। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के दुरुपयोग को रोकने के लिए अगर राज्य को बीच में आकर कार्रवाई करनी पड़े तो ये स्थिति ठीक नहीं है। कोर्ट न ये भी कहा है कि हेट स्पीच कंटेंट पर कुछ नियंत्रण बेहद जरूरी है। देश के नागरिकों को भी इस प्रकार के कंटेंट को शेयर करने, प्रमोट करने से बचना चाहिए।
सोमवार को अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े दो मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था। एक मामला था वजाहत खान का। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाला वजाहत खान खुद सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट शेयर करता था। इसे लेकर उसके खिलाफ कई जगहों पर FIR दर्ज हुई है। उन सारे मामलों को एक साथ क्लब कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट आया है। वजाहत खान के खिलाफ पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हैं। वजाहत खान ने ही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ एक वीडियो में कथित रूप से सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी जिस शिकायत पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी हुई थी।
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार की जरूरत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि। नागरिकों के बीच भाईचारा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी पर उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई है। अगर कोई इस आजादी का दुरुपयोग करता है सरकार इसमें हस्तक्षेप कर सकती है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “कोई नहीं चाहता कि राज्य हस्तक्षेप करे। हम सेंसरशिप की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और व्यक्तियों की गरिमा के हित में है। यह केवल इस याचिकाकर्ता की बात नहीं है। हमें इससे आगे जाकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।”
“कोई नहीं चाहता कि राज्य हस्तक्षेप करे। हम सेंसरशिप की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और व्यक्तियों की गरिमा के हित में है।”
– सुप्रीम कोर्ट
दूसरा मामला था कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय का। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर कथित रूप से मानहानिकारक कार्टून बनाने से जुड़ा है। हेमंत मालवीय ने कोविड-19 महामारी के दौरान एक कार्टून बनाया था। जिसे लेकर उनके खिलाफ़ एफआईआर दर्ज है। हेमंत मालवीय ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने इस मामले में राहत नहीं दी तो मामला सुप्रीम कोर्ट आया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत मालवीय के वकील ने उनके बचाव में दलील दी कि यह कार्टून कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया था। उस समय वैक्सीन को लेकर गलत जानकारी और डर फैला हुआ था। उन्होंने कहा कि कार्टून एक व्यंग्य था। इसका मकसद उन लोगों पर कटाक्ष करना था जो वैक्सीन को ‘सुरक्षित पानी’ बता रहे थे, जबकि उनका ठीक से परीक्षण भी नहीं हुआ था। मालवीय ने यह भी कहा कि कार्टून में एक कलाकार ने एक नागरिक को एक नेता से टीका लगवाते हुए दिखाया था।
सोमवार को कोर्ट ने मालवीय को गिरफ्तारी से बचाने का कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बोलने की आजादी जरूरी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि कोई भी कुछ भी बोले। अगर कोई बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसे इसकी सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट के रुख को देखते हुए हेमंत मालवीय अपना कार्टून डिलीट करने के लिए तैयार हो गए हैं। आज एक बार उनकी याचिका पर सुनवाई होनी है, जब कोर्ट तय करेगा कि उनको अग्रिम जमानत मिलेगी या नहीं।