मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई के सामने जब एक एडवोकेट ने जस्टिस यशवंत वर्मा को केवल उनके सरनेम से संबोधित किया तो सीजेआई जस्टिस गवई ने उस पर नाराज़गी जताई और शिष्टाचार की नसीहत भी दिए।
सुप्रीम कोर्ट के वकील मैथ्यू नेदुम्परा ने घर पर मिले कैश मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR करने की मांग की है। सोमवार को मैथ्यू नेदुम्परा ने उस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कोर्ट को बताया कि ‘माई लॉर्ड यह मेरी तीसरी याचिका है।’
सीजेआई गवई ने कहा कि ‘अगर आप चाहते हैं कि इस याचिका को अभी खारिज कर दूं, तो मैं अभी कर देता हूं!
मैथ्यू नेदुम्परा : माई लॉर्ड, इसे डिसमिस नहीं किया जा सकता! FIR तो दर्ज होनी ही चाहिए । लगता है ‘वर्मा’ भी यही चाहते हैं! इस मामले में FIR दर्ज होनी चाहिए ! (जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ जो जांच हुई है, वह बिना FIR दर्ज किए हुई है।)
जस्टिस गवई : आप जस्टिस वर्मा को ऐसे कैसे संबोधित कर सकते हैं! क्या वो आपके फ्रेंड हैं?.. वो अभी भी एक सम्मानित जज हैं। शिष्टाचार मत भूलिए।
नेदुम्परा: मुझे नहीं लगता कि उनके लिए इसकी जरूरत है! उन्होंने ऐसा कोई महानता का काम नहीं किया है। आपको इस मामले को लिस्ट करना होगा।
सीजेआई गवई : आप अदालत को यह मत बताइए कि क्या करना है।
नेदुम्परा : नहीं बता नहीं रहा, मैं केवल अनुरोध कर रहा हूं।
और इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने मैथ्यू नेदुम्परा की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इन्कार कर दिया।
एडवोकेट मैथ्यू नेदुम्परा ज्यूडिशियरी में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विधिक सुधारों के लिए मुखर रहे हैं, और ‘National Lawyers’ Campaign’ जैसे संगठनों के संस्थापक भी हैं। मैथ्यू नेदुम्परा न्यायपालिक के कॉरिडोर में अक्सर सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट उन्हें कोर्ट की अवमानना के मामले में सजा सुना चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में मैथ्यू नेदुम्परा को एक वरिष्ठ वकील का नाम लेकर यह आरोप लगाने के लिए अवमानना का दोषी ठहराया कि न्यायाधीशों के बेटे और बेटियों को ‘सीनियर एडवोकेट’ का पद देने में वरीयता दी जाती है। जस्टिस आर नरीमन और जस्टिस विनीत सारन की बेंच ने उन्हें अवमानना का दोषी ठहराया था और 3 महीने जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उनके बिना शर्त माफी मांगने पर उनकी सजा निलंबित कर दी गई थी। लेकिन कोर्ट ने वकील नेदुम्परा को एक साल के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने से रोक दिया गया था। मैथ्यू नेदुम्परा न्यायपालिका में नियुक्तियों की कॉलेजियम सिस्टम की आलोचना करने के लिए भी जाने जाते है।
एक बार तत्कालीन सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच के सामने मैथ्यू नेदुम्परा के चलते अप्रिय स्थिति पैदा हो गई थी। NEET-UG परीक्षा से जुड़ी सुनवाई के दौरान नेदुम्परा ने बिना उनकी बारी आए बोलना शुरू कर दिया। जस्टिस चंद्रचूड के बार बार मना करने के बावजूद जब मैथ्यू नेदुम्परा नहीं माने तब जस्टिस चंद्रचूड़ बहुत नाराज़ हो गए। उन्हें चेतावनी दी कि आप ऐसा न करें। उन्हें याद भी दिलाया कि CJI कोर्टरूम के इंचार्ज हैं। लेकिन नेदुम्परा बहस करते रहे। इससे गुस्साए जस्टिस चंद्रचूड़ ने तुरंत सिक्युरिटी बुलाने का आदेश दे दिया। लेकिन सिक्युरिटी के लोग उन्हें कोर्ट से बाहर ले जाते, नेदुम्परा उससे पहले खुद ही कोर्ट रूम से निकल गए थे।