सब मामला सुप्रीम कोर्ट ही सुनेगा तो बाकी अदालतें क्या करेंगी- SC
प्रभावशाली और संपन्न लोगों द्वारा निचली अदालतों को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा ऐतराज़ ज़ाहिर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने जज जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि “अगर सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में ही सुने जाएंगे तो बाकी अदालतों का क्या होगा! यह तभी होता है, जब कोई संपन्न व्यक्ति इसमें शामिल होता है। गरीब व्यक्ति आखिर कहां जाएगा? अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम मुक़दमेबाज़, आम वकील के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई जगह नहीं बचेगी।”
“अगर सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में ही सुने जाएंगे तो बाकी अदालतों का क्या होगा! यह तभी होता है, जब कोई संपन्न व्यक्ति इसमें शामिल होता है। गरीब व्यक्ति आखिर कहां जाएगा? अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम मुक़दमेबाज़, आम वकील के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई जगह नहीं बचेगी।” – जस्टिस सूर्यकांत
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शराब, कोयला और महादेव सट्टा एप घोटालों में नाम आने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। साथ ही शराब घोटाले में गिरफ्तार उनके बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी। जब मामला सुनवाई के लिए आया था तो कोर्ट ने सवाल किया कि आप सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आ गए। आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए ?
जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने निचली अदालतों को छोड़ सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की प्रवृत्ति के कारण सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ते बोझ पर चिंता व्यक्त की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “अगर हमें ही सब कुछ सुनना है, तो बाकी अदालतों का क्या मकसद है? हर राज्य में एक हाई कोर्ट होता है। क्या आपको लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के लिए हर चीज़ से निपटना आसान है?”
कोर्ट ने भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ईडी जांच से संबंधित मामले में पहले हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। अदालत ने चैतन्य बघेल से कहा कि वह हालिया मनी लॉन्ड्रिंग जांच की कार्यवाही रद्द करने और दर्ज किए गए उनके सभी बयानों को रद्द करने की मांग वाली अपनी याचिका के साथ पहले हाई कोर्ट जाएं। साथ ही भूपेश बघेल को भी गिरफ्तारी से राहत के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख करने को कहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट PMLA के उस प्रावधान पर सुनवाई को तैयार हो गया है जिसे लेकर भूपेश बघेल का आरोप है कि PMLA का एक प्रावधान आरोपी व्यक्ति के आत्म-आरोपण से संरक्षण (self-incrimination) और जांच एजेंसी द्वारा पूछताछ के दौरान चुप रहने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
शराब, कोयला और महादेव सट्टा ऐप घोटाले सहित अन्य मामलों में नाम सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। भूपेश बघेल ने सीबीआई और ईडी की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उन्हें इन मामलों में गिरफ्तार न किया जाए और जांच में सहयोग करने का अवसर दिया जाए। भूपेश बघेल ने अपनी याचिका में ये भी आरोप लगाया था कि जिस तरह उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष के तहत की गई, उसी तरह उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।