सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई और वरिष्ठता क्रम में दूसरे नंबर के जज और अगले मुख्य न्यायाधीश बनने वाले जज, जस्टिस सूर्यकांत ने निचली अदालतों के जजों के खिलाफ़ पर टिप्पणी करने की प्रवृत्ति को गलत बताया है।
जस्टिस गवई और जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि निचली अदालत के जजों की योग्यता पर ऊपर की अदालतों को सवाल नहीं उठाना चाहिए। अगर निचली अदालत के फैसले में कोई कमी है तो ऊपर की अदालतें, उसमें सुधार कर सकती हैं, बदलाव कर सकती हैं या फैसले को रद्द कर सकती हैं। जजों की योग्यता पर सवाल नहीं उठा सकतीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने हाईकोट के जज की योग्यता पर सवाल उठाया था। हाईकोर्ट के जजों ने विरोध जताया, जस्टिस पारदीवाला को अपना आदेश बदलना पड़ा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार के एक फैसले में खामी पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उनके पास मौजूद आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) तुरंत वापस लिया जाए। क्योंकि वो क्रिमिनल मामलों की सुनवाई के योग्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाराज़ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों ने, हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस से मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर अमल नहीं होना चाहिए।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई ने जस्टिस पारदीवाला से अनुरोध किया कि वो इस फैसले पर पुनर्विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए मामले पर सुनवाई की। जस्टिस पारदीवाला और आर महादेवन ने अपने आदेश में बदलाव किया।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई ने कहा कि ‘जिस जज ने कभी गलती नहीं की, वह अभी तक पैदा नहीं हुआ है’। यही बात हाई कोर्ट के जजों पर भी लागू होती है। उन्हें निचली अदालत के जजों की क्षमता पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को यह देखना चाहिए कि कैसे सुधार किया जा सकता है। हाई कोर्ट्स को निचली अदालतों के जजों को प्रशिक्षण देना चाहिए, ताकि वे कानून के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल कर सकें और अदालत में सही व्यवहार कर सकें इससे न्याय प्रणाली बेहतर होगी और लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
जिस जज ने कभी गलती नहीं की, वह अभी तक पैदा नहीं हुआ है’। यही बात हाई कोर्ट के जजों पर भी लागू होती है। उन्हें निचली अदालत के जजों की क्षमता पर सवाल नहीं उठाना चाहिए – जस्टिस बीआर गवई, CJI
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हाईकोर्ट के जज और न्यायिक अधिकारी अलग-अलग सामाजिक स्तरों से आते हैं। उनके पास जीवन के कई अनुभव होते हैं। इन अनुभवों को कानूनी प्रशिक्षण के साथ मिलाकर न्याय प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे अदालत में आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सकता है और लोगों की शिकायतों को दूर किया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि हाईकोर्ट के कौन से जज किस तरह के मामलों की सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट केवल अपने फैसलों से हाईकोर्ट का मार्गदर्शन कर सकता है। जजों को मामले सौंपना और रोस्टर तय करना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का काम है।
जस्टिस गवई और जस्टिस सूर्यकांत की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पारदीवाला के उसी आदेश के आलोक में थी जिस आदेश को बाद में बदलना पड़ा था। जस्टिस पारदीवाला भी देश के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। वरिष्ठता क्रम के मुताबिक 2028 में CJI बनेंगे और उनका कार्यकाल 2 वर्ष 3 महीने का होगा।
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