जस्टिस नागरत्ना : असहमति की आवाज़
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस बी आर गवई ने शुक्रवार को मुंबई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आलोक अराधे के साथ पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलाया। जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली का सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में कार्यकाल लंबा होगा। वे देश के मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे। अक्टूबर 2031 से मई 2033 तक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल लगभग एक वर्ष आठ महीने का होगा।
इस शपथ के साथ ही जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली के सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए जाने पर विवाद पर विराम भले ही थम गया है, लेकिन उनकी नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सदस्य जस्टिस नागरत्ना की असहमति की आवाज़ आने वाले समय में गूंजती रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट को मिले दो नए जज। जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली को CJI जस्टिस गवई ने शपथ दिलाई। @news24tvchannel pic.twitter.com/MGUUZpERB0
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) August 29, 2025
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय कॉलेजियम जब पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही थी, कॉलेजियम की एक सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्ना इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ थीं। उन्होंने जस्टिस पंचोली के नाम पर असहमति जताया था। हालांकि असहमति का नोट अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन असहमति वाली बात सार्वजनिक हो गई थी। हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस नागरत्ना ने अपने असहमति नोट में कहा था कि जस्टिस पंचोली वरिष्ठता क्रम में काफी नीचे थे। वे मौजूदा जजों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 57वें नंबर पर थे और उनकी सिफारिश करते वक्त कई प्रतिभाशाली और वरिष्ठ जजों को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा वे गुजरात हाईकोर्ट से हैं और सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही गुजरात के दो जज हैं। गुजरात से तीसरा जज लाने से क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में कई राज्यों का कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं है। जस्टिस नागरत्ना ने जस्टिस पंचोली के गुजरात हाईकोर्ट से पटना हाईकोर्ट में हुए जुलाई 2023 ट्रांसफर के दौरान बनी थोड़ी विवादास्पद स्थिति का हवाला भी दिया था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि ऐसी नियुक्ति न्याय प्रशासन पर विपरीत असर डालेगी और कॉलेजियम सिस्टम की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले मई के महीने में भी जस्टिस नागरत्ना ने जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर अपनी आपत्ति जताई थी। तब कॉलेजियम ने उनकी जगह गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस एनवी अंजारिया को सुप्रीम कोर्ट के लिए चुना था।
जस्टिस नागरत्ना ने अपने नोट में इस बात पर हैरानी जताई है कि तीन महीने के भीतर ही जस्टिस पंचोली का नाम फिर से कैसे सामने आ गया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नियुक्ति से कॉलेजियम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। उनके नोट में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि जस्टिस पंचोली की नियुक्ति होती है, तो वे अक्टूबर 2031 से मई 2033 तक चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत हो सकते हैं, जो उनके अनुसार संस्थान के हित में नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश करने वाले 5 जजों के कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस जेके महेश्वरी और बीवी नागरत्ना शामिल हैं।
जस्टिस नागरत्ना की असहमति को नजरअंदाज कर दिया गया। और जस्टिस पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया। थोड़ी बहुत चर्चा हुई, थोड़ा बहुत शोर हुआ। और लगता है कि मामला शांत हो गया। लेकिन ऐसा निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। क्योंकि असहमति के स्वर की अपनी आवाज़ होती है जो समय पाकर कभी कभी शोर का रूप धारण कर लेती है।
जस्टिस पंचोली का कार्यकाल लंबा रहने वाला है, वो देश के मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे। जस्टिस नागरत्ना की असहमति का स्वर उनका पीछा करेगा। जस्टिस नागरत्ना ने कॉलेजियम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर जो सवाल खड़ा किया था, वह सवाल कॉलेजियम और न्यायपालिका का पीछा करेंगे! जस्टिस नागरत्ना का कार्यकाल भी अभी करीब दो साल बाकी है। वो भी कुछ दिन के लिए देश का मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश होंगी।