अगर महिलाओं को संवैधानिक अदालतों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता और सिर्फ़ लैंगिक समानता की बात की जाती है, तो यह महज़ दिखावटीपन (टोकनिज़्म) होगा। पूर्व सीजेआई जस्टिस एन वी रमना ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की अपर्याप्त संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पिछले 75 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट में केवल 11 महिला जज हुई हैं। इनमें से तीन जज, उनके सीजेआई रहने के दौरान नियुक्त हुई थीं। जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस नागरत्ना ने 31 अगस्त 2021 को जस्टिस रमना ने ही शपथ दिलाई थी। इनमें से जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी सेवानिवृत्त हो चुकी हैं और जस्टिस नागरत्ना, सितंबर 2027 में देश की पहली मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। उनका कार्यकाल मात्र 36 दिन का होगा।
एसआरएम स्कूल ऑफ लॉ में शनिवार को एक सेमिनार को संबोधित करते हुए जस्टिस रमना ने कहा कि “हमारी संस्थाएँ हमारे सामाजिक ताने-बाने को प्रतिबिंबित करें। लैंगिक विविधता और समावेशिता कोई दिखावा नहीं है, बल्कि यह ज़रूरी है ताकि हमारे दृष्टिकोण सामाजिक वास्तविकताओं से समृद्ध हों। इस मुद्दे पर व्यापक विचार की आवश्यकता है। समावेशिता अपने आप नहीं आती… इसे लाने के लिए उच्चतम स्तर पर संगठित प्रयास करने होंगे।”
हाल ही में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने को लेकर विवाद हुआ था तब भी यह चर्चा उठी थी कि सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की नियुक्ति पर क्यों विचार नहीं किया गया। सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल पंचोली को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि उनसे सीनियर तीन महिला जजों की अनदेखी क्यों की गई ? सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर चर्चा करते हुए इंदिरा जयसिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि पदोन्नति के लिए संभावित रूप से विचार किए जा सकने वाले सीनियर जजों में तीन महिला जज थीं – जस्टिस सुनीता अग्रवाल (गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस); जस्टिस रेवती मोहिते डेरे (बॉम्बे हाईकोर्ट) और जस्टिस लिसा गिल (पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट)। लेकिन उनके नामों पर विचार नहीं किया गया। इंदिरा जयसिंह ने सोशल मीडिया पर पूछा था कि “क्या महिला सशक्तिकरण की बात करना सिर्फ़ पाखंड है! क्या समझदारी सिर्फ़ पुरुषों में ही है?”
At least 3 woman judges are Senior to Justice Vipul Pancholi. They are Justices Sunita Agarwal, Revati Mohite Dere&Lisa Gill. This makes three judges from Gujrat, two will be CJI @utkarsh_aanand @barandbench @LiveLawIndia @toi_dhananjayM @TheLeaflet_in
— Indira Jaising (@IJaising) August 25, 2025
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जब जस्टिस पंचोली को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही थी, कॉलेजियम की सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्ना इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ थीं। उन्होंने जस्टिस पंचोली के नाम पर असहमति जताया था। हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस नागरत्ना ने अपने असहमति नोट में कहा था कि जस्टिस पंचोली वरिष्ठता क्रम में काफी नीचे थे। वे मौजूदा जजों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 57वें नंबर पर थे और उनकी सिफारिश करते वक्त कई प्रतिभाशाली और वरिष्ठ जजों को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा वे गुजरात हाईकोर्ट से हैं और सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही गुजरात के दो जज हैं।
जस्टिस पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने में महिला जजों की अनदेखी से उपजे सवाल और पूर्व सीजेआई जस्टिस रमना के द्वारा संवैधानिक अदालतों में महिला जजों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर चिंता, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के लिए संकेत है कि अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति करते समय महिला प्रतिधित्व पर ध्यान देने की जरूरत है।