जब भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के खिलाफ कोई मामला आता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की बात होती है तो महाभियोग की बात होने लगती है। जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में भी संसद में उनको पद से हटाने की कार्रवाई की चर्चा है। ऐसे में जानना जरूरी है कि जजों को हटाने की प्रक्रिया Removal कही जाती है। आम बोलचाल की भाषा में इसे जज का महाभियोग (impeachment) कहा जाता है, लेकिन संविधान में तकनीकी रूप से इसे removal यानी पद से हटाना कहा गया है। महाभियोग की प्रकिया रिमूवल से अलग होती है।
सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए आर्टिकल 124(4) और हाईकोर्ट के जजों के लिए आर्टिकल 218 में रिमूवल की व्यवस्था दी गई है। जजों को हटाने, पूरी जांच और संसदीय प्रक्रिया Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत चलती है।
महाभियोग और रिमूवल में अंतर
राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रकिया अपनाई जाती है। आर्टिकल 61 के मुताबिक, संविधान के उल्लंघन’ (Violation of the Constitution) के आधार पर महाभियोग के जरिए राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है।
जबकि जजों के मामले में रिमूवल के लिए ‘सिद्ध कदाचार’ (Proven Misbehaviour) या ‘अक्षमता’ (Incapacity) शर्त होती है।
• महाभियोग के लिए संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है लेकिन इसके 14 दिन का लिखित नोटिस देना जरूरी है। इस नोटिस पर पर सदन के एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
रिमूवल में 14 दिन पहले नोटिस जैसी शर्त नहीं होती। लोकसभा में 100 सदस्यों या राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव शुरू होता है।
• रिमूवल प्रस्ताव स्वीकार होने पर 3 सदस्यों की एक विशेष जांच समिति गठित होती है जो आरोपों की जांच करती है। इस जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रतिष्ठित न्यायविद् शामिल होते हैं। – महाभियोग में ऐसी जांच समिति की जरूरत नहीं होती। सदन स्वयं या उसके द्वारा नियुक्त समिति जांच करती है।
• राष्ट्रपति का महाभियोग भारत में सबसे कठिन बहुमत (Strict Absolute Majority) की मांग करता है, जबकि जजों या अन्य अधिकारियों को हटाने (Removal) की प्रक्रिया में दोहरे बहुमत (Dual Majority) की आवश्यकता होती है।
महाभियोग के लिए प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई (2/3rd of the Total Membership) बहुमत जरूरी है। उदाहरण के लिए यदि लोकसभा में कुल सीटें 543 हैं, तो प्रस्ताव पास करने के लिए कम से कम 362 सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है, भले ही सदन में उस दिन केवल 400 सदस्य ही क्यों न आए हों।
रिमूवल के लिए ‘विशेष बहुमत’ (Special Majority) की व्यवस्था है। इसमें दो शर्तों को एक साथ पूरा करना होता है। सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (50% से अधिक)।
और मतदान के दिन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3rd of Present and Voting) बहुमत आवश्यक होता है।
उदाहरण के लिए यदि लोकसभा की कुल संख्या 543 है, तो पहली शर्त के अनुसार कम से कम 272 वोट पक्ष में होने चाहिए। यदि किसी दिन 450 सदस्य उपस्थित होकर वोट करते हैं, तो दूसरी शर्त के अनुसार 450 का 2/3 यानी 300 वोट पक्ष में होने चाहिए। प्रक्रिया को सफल होने के लिए 300 वोटों की आवश्यकता होगी।