जस्टिस सूर्यकांत आज देश के 53 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लें रहे हैं। राष्ट्रपति भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में ब्राजील सहित दुनिया के सात देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल होंगे। इस समारोह में ब्राजील के अलावा भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के चीफ जस्टिस उनके साथ आए परिवार के सदस्य शामिल होंगे। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी CJI के शपथ ग्रहण में इतनी बड़ी संख्या में दूसरे देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति होगी।
जस्टिस सूर्यकांत का परिचय
1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने 1981 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से बीए और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से LLB की पढ़ाई की है। जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में हिसार ज़िला न्यायालय में लॉ की प्रैक्टिस शुरू की। 1985 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। साल 2000 में उनको हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता नियुक्त होने का गौरव प्राप्त है। 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के परमानेंट जज के रूप में उनकी पदोन्नति होने तक वे हरियाणा के महाधिवक्ता के पद पर रहे।
जस्टिस सूर्यकांत 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त हुए। संवैधानिक मामलों, चुनाव सुधार, पुलिस सुधार, नागरिक अधिकार और प्रशासनिक कानून के मामलों में उनकी मजबूत पहचान रही है।
सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के बाद से जस्टिस सूर्यकांत 300 से अधिक बेंचों का हिस्सा रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग को मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखे गए 65 लाख वोटरों का ब्योरा सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया था।
जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सीबीआई के आबकारी नीति मामले में जमानत देने वाली बेंच का नेतृत्व किया था जिसने सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता’ की छवि से बाहर निकलने की नसीहत दी थी।
जस्टिस सूर्यकांत ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में मीडिया ब्रीफिंग के लिए चर्चा में आईं कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को फटकार लगाया था और नसीहत दी थी कि थी संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, मंत्रियों को हर शब्द पूरी जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत 7 जजों की उस बेंच का भी हिस्सा थे जिसने 1967 के एएमयू के फैसले को खारिज किया था, जिससे उसके अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुला था।
सोमवार को शपथ ग्रहण कर रहे देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की प्राथमिकता भी अदालतों में लंबित मामलों से निपटने की होगी।
सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले रिपोर्टर्स से मुलाकात के दौरान अपनी प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट और जजों की ट्रोलिंग से… pic.twitter.com/Z5uTs6WnZc
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) November 22, 2025
CJI के रूप में जस्टिस सूर्यकांत की प्राथमिकताएं:
शपथ ग्रहण से पहले शनिवार को कोर्ट रिपोर्टर से मुकालात के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने चीफ जस्टिस के तौर पर अपनी प्राथमिकताऐं बताई।
• लंबित (पेंडेंसी) मामलो को कम करना – जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में लगभग 90,000 मामले लंबित हैं। वे पैन-इंडिया स्तर पर मामलों की पेंडेंसी को देखना चाहते हैं — सिर्फ SC की पेंडेंसी नहीं, बल्कि हाई कोर्ट और निचली अदालतों की भी रिपोर्ट लेंगे। वे सबसे पुराने मामलों (oldest cases) को प्राथमिकता देने की बात कर चुके हैं।
• मध्यस्थता (Mediation) को बढ़ावा देना : उनका मानना है कि mediation (विचार-विवाद का आपसी समाधान) एक “गेम-चेंजर” हो सकता है। वे न सिर्फ अदालतों में mediation बढ़ाना चाहते हैं, बल्कि सरकारी विभागों को भी प्रोत्साहित करेंगे कि वे mediation को अपनाएँ।
CJI के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल करीब 15 महीने का होगा। जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।