महाभियोग की तैयारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के राह की एक बाधा दूर हो गई है। महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के 100 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने रविवार को कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के सिलसिले में संसद में प्रस्ताव पेश करने के लिए 100 से ज्यादा सांसदों ने पहले ही एक नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 124 के अनुसार, किसी जज के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरुरत होती है।
जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव कब आएगा अभी ये तय नहीं है। लेकिन इतना तय है कि सरकार इसे सोमवार से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में लाने की तैयारी कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने एक सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सांसदों के हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है और यह पहले ही 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सत्र के एजेंडे को तय करने वाली सर्वदलीय समिति, यानी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC), तय करेगी कि प्रस्ताव को सदन में कब लाया जाएगा।
एक बार महाभियोग प्रस्ताव को किसी एक सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस सदन के अध्यक्ष ( लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा के सभापति) की ओर से एक तीन-सदस्यीय समिति गठित की जाती है। इसमें सीजेआई या कोई सुप्रीम कोर्ट का कोई जज, जो समिति के अध्यक्ष होते हैं, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होते हैं।
सरकार ने कहा है कि वह इस महाभियोग प्रस्ताव को मानसून सत्र में लाएगी और उसे विभिन्न दलों, यहां तक कि विपक्ष का भी समर्थन मिल रहा है, क्योंकि यह कदम न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाया जा रहा है। किरण रिजिजू ने कहा कि जब तक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी और स्पीकर से इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती और तब तक वे इस विषय पर और कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
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मामले की पृष्ठभूमि
दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में होली की रात 14 मार्च को आग लग गई थी।उस वक्त वे और उनकी पत्नी भोपाल में थे। घर पर उनकी बेटी और बुजुर्ग मां मौजूद थीं। आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन कर्मियों ने एक स्टोर रूम में नकदी से भरे बोरों में आग लगी हुई देखी। इसके बाद घटनास्थल से दो वीडियो सामने आने पर मामले ने तूल पकड़ा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले में जांच की सिफारिश की थी। उसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना के तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सीजेआई ने सरकार को लिखा था कि जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू की जाए।