'ऑपरेशन सक्सेसफुल बट पेशेंट इज डेड' / फोटो : प्रभाकर मिश्रा
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि संसद को, विधायकों की अयोग्यता (disqualification) के मामलों में निर्णय लेने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।क्योंकि कई बार विधानसभा अध्यक्ष इन मामलों में जानबूझकर देरी करते हैं जिससे दलबदलू विधायकों के खिलाफ कार्रवाई बेअसर हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई है कि विधानसभा अध्यक्ष और स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में अत्यधिक देरी करते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कमजोर होती हैं और दलबदल को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई ने अपने फैसले में कहा, है कि “संसद ने सांसदों और विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं के निपटान का अधिकार स्पीकर को इसलिए दिया ताकि अदालतों की तरह इन मामलों में देर न हो। लेकिन वर्षों के अनुभव ने दिखाया है कि स्पीकर इन मामलों को वर्षों तक लंबित रखते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया ही बेकार हो जाती है।”
संसद ने सांसदों और विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं के निपटान का अधिकार स्पीकर को इसलिए दिया ताकि अदालतों की तरह इन मामलों में देर न हो। लेकिन वर्षों के अनुभव ने दिखाया है कि स्पीकर इन मामलों को वर्षों तक लंबित रखते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया ही बेकार हो जाती है। – जस्टिस बी आर गवई
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना में BRS के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वे कांग्रेस में शामिल हुए 10 BRS विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला करें। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराज़गी जताई है कि स्पीकर ने इन विधायकों को 7 महीने बाद सिर्फ तभी नोटिस भेजा जब कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह ऐसी स्थिति को अनुमति नहीं दे सकती जहां “ऑपरेशन सफल हो गया, लेकिन मरीज की मौत हो गई”, यानी अयोग्यता याचिकाएं विधानसभा के कार्यकाल तक लंबित रह जाएं और दलबदलू विधायक देरी का फायदा उठाकर पूरा लाभ उठाएं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियों में अगर स्पीकर को निर्देश नहीं दिए गए, तो यह संविधान की दसवीं अनुसूची के मूल उद्देश्य को ही निष्फल कर देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि यदि अयोग्यता का सामना कर रहे विधायक कार्यवाही को जानबूझकर लंबा खींचते हैं, तो स्पीकर उनके खिलाफ प्रतिकूल आदेश जारी कर सकते हैं।