सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद देश में कानूनी और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस छिड़ गई है। पहले उनके बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए हाईकोर्ट के कुछ रिटायर्ड जजों, वरिष्ठ वकीलों और समाज सेवियों ने खुला पत्र लिखा था। जवाब में 44 से अधिक सेवानिवृत्त सुप्रीम और हाई कोर्ट जजों ने जस्टिस सूर्यकांत के समर्थन में खुला पत्र लिखकर सीजेआई के खिलाफ ‘मोटिवेटेड कैंपेन’ की निंदा की है।
रोहिंग्या मामले मे सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी पर कुछ रिटायर जजों और वकीलों ने चार दिन पहले CJI की टिप्पणी पर ऐतराज करते हुए खुला पत्र लिखा था।
अब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 44 रिटायर्ड जजों ने CJI के समर्थन में पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि CJI ने… pic.twitter.com/wApQw0oAop
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) December 10, 2025
रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े मामले पर दो दिसंबर को सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल उठाया था कि ‘क्या अवैध रूप से आए लोगों को हम रेड कार्पेट वेलकम दें?’ और यह भी पूछा था कि क्या उन्हें भारत में शरणार्थी का वैध दर्जा प्राप्त है? मुख्य न्यायाधीश के बयान पर विरोध जताने वालों का कहना है कि अदालत को संवेदनशील मानवीय मुद्दों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतना चाहिए। सीजेआई की टिप्पणी में रेड कार्पेट जैसे शब्दों से शरणार्थियों को कठोर रूप से प्रस्तुत किया गया, जबकि कई रोहिंग्या हिंसा और उत्पीड़न से भागकर आए हैं। यही नहीं, उनका ये भी तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, शरणार्थी अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और राज्य एजेंसियों की कड़ी कार्रवाई को वैधता दे सकती है।
जस्टिस सूर्यकांत के समर्थन में पत्र लिखने वालों की दलील है कि CJI जस्टिस सूर्यकांत के द्वारा पूछे गए सवाल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा थे और उनका गलत अर्थ निकालकर पूर्वाग्रह का रंग देने की कोशिश है। यह न्यायपालिका को कमज़ोर करने जैसा है। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि CJI ने मानवता को नजरअंदाज नहीं किया बल्कि कहा कि हिरासत में किसी के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व जजों ने चिठ्ठी में लिखा है कि जजों के खिलाफ़ मोटिवेटेड कैंपेन चलाना लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए ख़तरा है। जस्टिस सूर्यकांत के समर्थन में पत्र लिखने वालों में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अनिल दवे और जस्टिस हेमंत गुप्ता शामिल हैं।
हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अलग अलग मुद्दों पर खुला पत्र लिखने लगे हैं। कुछ दिन पहले राहुल गाँधी और विपक्षी पार्टियों के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग पर वोट चोरी और पक्षपात के आरोपों के लेकर सिविल सोसाइटी के 272 लोगों ने खुला पत्र लिखकर विरोध जताया था। उसमें भी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और NGT के चेयरमैन जस्टिस आदर्श गोयल, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस हेमंत गुप्ता, दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एस एन ढिंगरा सहित कई हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और सेना के रिटायर्ड अधिकारी शामिल थे।
उपराष्ट्रपति चुनाव के समय विपक्ष समर्थित उम्मीदवार जस्टिस एस सुदर्शन रेड्डी को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों और कुछ सीनियर एडवोकेट्स ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी कर गृहमंत्री के बयान की निंदा की थी। अमित शाह ने कहा था जस्टिस एस सुदर्शन रेड्डी नक्सलवाद के समर्थक रहे हैं। उन्होंने 2011 के अपने फैसले में यदि सलवा जुडूम को असंवैधानिक नहीं घोषित किया होता तो … 2020 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा हो गया होता!