हियरिंग के दौरान बीयर पीते एडवोकेट/ फोटो: सौजन्य सोशल मीडिया
गुजरात हाईकोर्ट में वर्चुअल हियरिंग के दौरान बीयर के मग के साथ पेश हो रहे सीनियर एडवोकेट के मामले पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उस एडवोकेट के ख़िलाफ़ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। जिसमें वर्चुअल हियरिंग के दौरान एक शख्स टॉयलेट में शौच करता हुआ दिखा था। कोर्ट ने उसपर दो लाख का जुर्माना और हाईकोर्ट परिसर में सामुदायिक सेवा का दंड सुनाया था। यह एक आम आदमी था जिसे कोर्ट के नियम क़ानून और कोर्ट में कैसे पेश होते हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं रही होगी! लेकिन ये मामला उससे बहुत अलग है। एक सीनियर एडवोकेट, जिसे कोर्ट में बहुत सम्मान की नज़र से देखा जाता है। जजेज भी उन्हें अधिक सम्मान देते हैं। ऐसा एक एडवोकेट बीयर का मग थामे कोर्ट के सामने पेश हुआ। एडवोकेट का यह कृत्य अवमानना के दायरे में तो आएगा ही!
#GujaratHighCourt Initiates Suo Motu Contempt Against Senior Advocate For VC Appearance With Beer Mug, To Reconsider Senior Status | @ISparshUpadhyay https://t.co/hJdUUg0FBN
— Live Law (@LiveLawIndia) July 1, 2025
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद कोर्ट ने यह कदम उठाया है। घटना 25 जून की है। गुजरात हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप भट्ट के सामने सीनियर एडवोकेट भास्कर तन्ना पेश हो रहे थे। कथित वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सीनियर एडवोकेट के हाथ में बीयर का मग है और वो फोन पर किसी से बात भी कर रहे हैं।
अपने एडवोकेट की इस हरकत से नाराज़ हाईकोर्ट ने कहा कि भास्कर तन्ना का यह व्यवहार कोर्ट द्वारा उन्हें दिए गए सीनियर एडवोकेट के स्टेटस के खिलाफ़ है। जस्टिस सुपेहिया ने यहां तक कह दिया कि भास्कर तन्ना का आचरण ऐसा है कि उनसे सीनियर एडवोकेट की उपाधि ही ले लेनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई करने का फैसला किया। जस्टिस एएस सुपेहिया और न्यायमूर्ति आरटी वच्छानी की बेंच ने एडवोकेट भास्कर तन्ना के आचरण को अपमानजनक बताते हुए उनको वर्चुअल मोड (ऑनलाइन हियरिंग ) से पेश होने से रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट तन्ना के कृत्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि इसे अनदेखा किया जाता है तो यह कानून के शासन के लिए विनाशकारी होगा।
एडवोकेट भास्कर तन्ना का यह व्यवहार कोर्ट द्वारा उन्हें दिए गए सीनियर एडवोकेट के स्टेटस के खिलाफ़ है। उनका आचरण ऐसा है कि उनसे सीनियर एडवोकेट की उपाधि ही ले लेनी चाहिए। – जस्टिस ए एस सुपेहिया, जज, गुजरात हाईकोर्ट
कोविड के दौरान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल हियरिंग की शुरुआत हुई थी। शुरू शुरू में इस तरह की घटनाएं आम थीं। कई बार एडवोकेट आधे अधूरे कपड़े में पेश हो जाते थे। कई बार भूल जाते थे कि उनका कैमरा ऑन है और कोर्ट को मर्यादा के प्रतिकूल व्यवहार करते थे। उन्हीं दिनों की बात है। सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई के दौरान एक वकील टी-शर्ट पहनकर बेड पर लेटकर शामिल हुए थे। कोर्ट ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा था कि वर्चुअल सुनवाई में भी कम से कम शिष्टाचार बनाए रखें।
उन्हीं दिनों एक और वर्चुअल हियरिंग की एक और तस्वीर दिखी थी, जो वायरल नहीं हुई। सीनियर एडवोकेट राजीव धवन राजस्थान हाईकोर्ट में किसी मामले में पेश हो रहे थे। उस मामले में एक पक्ष के लिए कपिल सिब्बल भी थे। राजीव धवन को स्मोकिंग की तलब लगी, खुद को रोक नहीं पाए! सिब्बल जब दलील रख रहे थे, धवन ने फाइल की आड़ में हुक्के का एक कस ले लिया। लेकिन हुक्के का धुंआ ऑनलाइन देख रहे सब लोगों ने देख लिया था। पता नहीं हाईकोर्ट के जजों ने देखा था या नहीं! गनीमत रही कि वो वीडियो वायरल नहीं हुआ था।