भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया/ फोटो : AI जनरेटेड
भारत का उपराष्ट्रपति पद संवैधानिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है। यह देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। इसके साथ-साथ राज्यसभा (उच्च सदन) के सभापति की भी जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति पर ही होती है। संविधान में अनुच्छेद 63 से 70 तक उपराष्ट्रपति पद और चुनाव प्रक्रिया के बारे में उल्लेख है। चुनाव एक विशेष इलेक्टोरल कॉलेज संपन्न कराता है।
इलेक्टोरल कॉलेज
उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य वोट करते हैं। इसमें राज्यों की विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं होती। वर्तमान में यह संख्या 780 के आसपास होती है। हर सांसद का एक ही वोट माना जाता है।
उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यता
• कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष हो और
राज्यसभा का सदस्य बनने के योग्य हो। उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन कर सकता है।
• नामांकन के लिए कम से कम 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 सांसदों का अनुमोदक होना आवश्यक है।
• किसी लाभ के पद पर न हो (सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए)।
नामांकन की प्रक्रिया
• 15,000 रुपये की जमानत राशि चुनाव आयोग के पास जमा करनी होती है।
• नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) के बाद वैध उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाती है।
• किसी उम्मीदवार को नाम वापस लेना हो, तो वह निर्धारित समयसीमा के भीतर नाम वापसी की सूचना दे सकता है।
मतदान की प्रक्रिया
• मतदान गोपनीय मतपत्र प्रणाली (Secret Ballot) के जरिए किया जाता है। हर सांसद अपनी प्राथमिकता के अनुसार उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में रैंक देता है।
• अगर, किसी को पहले ही दौर में आवश्यक कोटा नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले को बाहर कर दिया जाता है।
• उसकी दूसरी वरीयता वाले वोट अन्य उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार कोटा पूरा नहीं कर लेता।
चुनाव होने के बाद मतगणना होती है। चुनाव आयोग परिणाम की औपचारिक घोषणा करता है। सबसे अधिक वैध वोट पाने वाला उम्मीदवार उपराष्ट्रपति निर्वाचित होता है।
उपराष्ट्रपति का शपथ और कार्यकाल
उपराष्ट्रपति को महामहिम राष्ट्रपति पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं शपथ के बाद वह तुरंत अपना कार्यभार संभाल लेते हैं। कार्यकाल पांच वर्षों का होता है, लेकिन वे दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं। उपराष्ट्रपति अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को देते हैं।
उपराष्ट्रपति की भूमिका
• उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
• राष्ट्रपति की तरह उपराष्ट्रपति के पास कार्यपालिका से जुड़ा कोई संवैधानिक दायित्व नहीं होता है।
• राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, मृत्यु या इस्तीफे की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव प्रक्रिया में अंतर
भारत में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव संविधान के तहत अलग-अलग प्रक्रियाओं से होते हैं। दोनों देश के शीर्ष संवैधानिक पद हैं, लेकिन निर्वाचक मंडल, वोटों की गिनती और कुछ नियमों में काफी अंतर है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं-
• राष्ट्रपति: संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सांसद और राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं। मनोनीत सांसद और विधायक वोट नहीं दे सकते।
उपराष्ट्रपति: केवल संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सांसद (निर्वाचित + मनोनीत) वोट डालते हैं। विधायक शामिल नहीं होते।
• राष्ट्रपति: उम्मीदवारी के लिए 50 प्रस्तावक और 50 समर्थक चाहिए।
उपराष्ट्रपति: 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक चाहिए।
• दोनों में एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली का उपयोग होता है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में वोटों का मूल्य अलग होने से गणना जटिल होती है, जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में सभी वोट बराबर होने से यह सरल है।
• राष्ट्रपति: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
उपराष्ट्रपति: राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं।
• राष्ट्रपति अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति को देते हैं।
उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंपते हैं ।
सामान्य ज्ञान: जगदीप धनखड़ भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दिया। इससे पहले वी.वी. गिरि (1969) और आर. वेंकटरमण (1987) ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था।
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