जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस तारा वितस्ता गंजू
दिल्ली हाईकोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। कुछ महीने पहले चर्चा हाईकोर्ट के एक जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले पर कैश मिलने को लेकर हो रही थी, इस बार हाईकोर्ट के दो जजों के अचानक ट्रांसफर को लेकर हो रही है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अरुण मोंगा को राजस्थान हाईकोर्ट और जस्टिस तारा वितस्ता गंजू को कर्नाटक हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है।
जस्टिस अरुण मोंगा अभी हाल ही में, राजस्थान हाईकोर्ट से ट्रांसफर होकर दिल्ली आए थे और 21 जुलाई 2025 को उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली थी। जस्टिस मोंगा ने 1991 में दिल्ली हाईकोर्ट से अपने वकालत की शुरुआत की थी। 20 वर्षों की वकालत के बाद , 2018 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए थे। जस्टिस गंजू ने भी 1995 में, अपने प्रैक्टिस की शुरुआत दिल्ली हाईकोर्ट से ही की थी और मई 2022 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का परमानेंट जज नियुक्त किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मोंगा क्रिमिनल मैटर और जस्टिस गंजू सिविल मामलों की सुनवाई करती हैं।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस न्यायमूर्ति गंजू के ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट के वकीलों ने सीजेआई जस्टिस गवई को पत्र लिखकर ट्रांसफर के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बार ऑफ इंडियन लॉयर्स ने जस्टिस मोंगा के लिए और दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की महिला वकीलों ने जस्टिस गंजू के लिए पत्र लिखा है। बार ऑफ इंडियन लॉयर्स ने चीफ जस्टिस बी आर गवई और कॉलेजियम को संबोधित पत्र में कहा गया है कि जस्टिस मोंगा का न्यायिक रिकॉर्ड, पेशेवर ईमानदारी और प्रस्तावित तबादले की असामान्य प्रकृति पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जस्टिस मोंगा के ट्रांसफर के समय पर चिंता जताते हुए बार ने कहा कि दिल्ली में शपथ लेने के कुछ ही हफ्तों में जस्टिस मोंगा का फिर से ट्रांसफर करना असामान्य और न्यायिक दक्षता व संस्थागत स्थिरता के लिए प्रतिकूल होगा। इससे न्यायिक प्रशासन की निष्पक्षता और निरंतरता पर जनता का विश्वास डगमगा सकता है।
Bar of Indian Lawyers has urged Chief Justice of India BR Gavai to reconsider the Collegium recommendation to transfer Delhi High Court Justice Arun Monga to Rajasthan High Court pic.twitter.com/3RvBtVQPKk
— Bar and Bench (@barandbench) September 4, 2025
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की महिला वकीलों ने भी हाल ही में जस्टिस तारा वितस्ता गंजू के अचानक तबादले के खिलाफ सीजेआई को पत्र लिखा था। 66 महिला वकीलों (जिनमें कई वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं) द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कहा गया कि तबादलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए। पत्र में लिखा गया, “हम, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की महिला वकीलें, इस पत्र के माध्यम से न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू के अचानक तबादले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कर रही हैं। हम उन्हें पिछले 30 वर्षों से जानते हैं और उनकी पेशेवर ईमानदारी व बेदाग रिकॉर्ड से भलीभांति परिचित हैं।”पिछले महीने, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने भी सीजेआई को पत्र लिखकर जस्टिस मोंगा और जस्टिस गंजू, दोनों के तबादले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम न्यायिक निरंतरता, वादकारियों के भरोसे और संस्थागत मनोबल पर असर डाल सकते हैं।
हाईकोर्ट के जजों का ट्रांसफर एक सामान्य प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम समय समय पर हाईकोर्ट के जजों के ट्रांसफर की सिफारिश करती रहती है। इस बार भी कॉलेजियम ने जस्टिस मोंगा और जस्टिस गंजू के साथ अलग अलग हाईकोर्ट के कुल 14 जजों के ट्रांसफ़र की सिफारिश सरकार को भेजी है। लेकिन चर्चा केवल इन दो जजों के ट्रांसफर को लेकर हो रही है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि एक महीने के अंदर ही हाईकोर्ट के जज को राजस्थान हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया। चूंकि ट्रांसफर की वजह बताई नहीं है, इसलिए हाईकोर्ट के वकीलों में कयासबाजी का दौर चल रहा है, जितने मुंह उतनी तरह की बातें! कोई कुछ खुलकर बोल भी नहीं सकता, क्योंकि मामला न्यायपालिका से जुड़ा है.. वकील खुलकर बोलने से डर रहे हैं … क्योंकि डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है!