प्रतीकात्मक फोटो/ AI जेनरेटेड
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में वकीलों के विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए कोई मैकेनिज्म बनाये जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 7 (d) के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया का यह विधिक दायित्व है कि वह वकीलों के विशेषाधिकारों के हनन को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। याचिका में एक समिति गठित करने की मांग की गई है जिससे विशेषाधिकार हनन की शिकायतों की जाँच समान, सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था के तहत की जा सके।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एडवोकेट आदित्य गोरे की याचिका पर बार काउंसिल आफ इंडिया और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। एडवोकेट आदित्य गोरे 2014 से वकीलों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार से एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल लाने की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आदित्य गोरे की याचिका को उस मामले के साथ जोड़ दिया है जिसमें जाँच एजेंसियों द्वारा वकीलों को पूछताछ के लिए सम्मन भेजने पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। अब दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी।
अपने क्लाइंट को कानूनी सलाह देने पर पुलिस द्वारा वकील को सम्मन भेजने के एक मामले में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मामले पर सुनवाई का फैसला किया था। कोर्ट ने इस संबंध में BCI, अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से भी राय मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी मामले से जुड़े वकील को पुलिस या जांच एजेंसियों के द्वारा पूछताछ के लिए बुलाना वकालत की पेशे की स्वायत्तता को कमज़ोर करेगा।
किसी मामले से जुड़े वकील को पुलिस या जांच एजेंसियों के द्वारा पूछताछ के लिए बुलाना वकालत की पेशे की स्वायत्तता को कमज़ोर करेगा : सुप्रीम कोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी सवाल पर कि क्या कोई जांच एजेंसी किसी पक्ष के एडवोकेट को सीधे समन जारी कर सकती है? कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल,… pic.twitter.com/F443vN6smM— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) June 25, 2025
गुजरात में 2024 में दो पक्षों के बीच हुए समझौते से जुड़े मामले में एक पक्ष के ख़िलाफ़ FIR दर्ज हुई थी। उस पक्ष की गिरफ्तारी के बाद उसके तरफ से जिस वकील ने जमानत दिलाई, बाद में पुलिस ने वकील से पूछताछ के लिए समन जारी किया था। हाईकोर्ट ने समन को रद्द करने से इंकार कर दिया था। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार को ED के समन कर दिया था। जिसकी खूब आलोचना हुई थी। हंगामे के बाद ED ने सम्मन वापस ले लिया था।