नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी समेत मामले से जुड़े सात आरोपियों को मंगलवार को बडी राहत मिली। दिल्ली की राउज़ ऐवन्यू कोर्ट ने ED द्वारा दाखिल अभियोजन शिकायत (जो चार्जशीट के समकक्ष होती है) पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने ED की मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत को मेंटेनेबल मानने से इंकार करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला कानूनी आधार पर है और आरोपों के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
कोर्ट ने अपने फैसले कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत दायर यह शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह मामला किसी एफआईआर पर आधारित नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत से जुड़ा है। मूल अपराध (Predicate offence) में बिना FIR दर्ज हुए मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत का मामला नहीं चल सकता। ED ने बीजेपी नेता डॉ सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर निजी शिकायत के आधार पर चार्जशीट दाखिल की थी, न कि किसी FIR के आधार पर।
“मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत दायर यह शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह मामला किसी एफआईआर पर आधारित नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत से जुड़ा है। मूल अपराध (Predicate offence) में बिना FIR दर्ज हुए मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत का मामला नहीं चल सकता।” – विशाल गोगने, स्पेशल जज।
कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या ED किसी अनुसूचित अपराध (Scheduled offence) में FIR के बिना ECIR दर्ज कर जांच शुरू कर सकती है और अभियोजन शिकायत दाखिल कर सकती है? कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि ऐसा करना ED अधिकार क्षेत्र से परे है।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि CrPC की धारा 200 के तहत किसी सार्वजनिक व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत और उस पर जारी समन आदेश के आधार पर PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, कोई भी शिकायतकर्ता पुलिस या जांच एजेंसी की तरह जांच नहीं कर सकता। सार्वजनिक व्यक्ति की शिकायत, भले ही उसमें scheduled offence का उल्लेख हो, ED को जांच का अधिकार नहीं देती।
कोर्ट ने कहा कि ED की शिकायत जिस आधार पर दाखिल की गई, वह FIR पर आधारित नहीं थी, बल्कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर जारी समन आदेश पर आधारित थी। ऐसी स्थिति में अदालत द्वारा संज्ञान लिया ही नहीं जा सकता।
कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि चूंकि संज्ञान शुद्ध कानूनी प्रश्न पर अस्वीकार किया जा रहा है, इसलिए आरोपों की सत्यता या तथ्यों पर बहस की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि PMLA के तहत जिस शिकायत की कल्पना कानून करता है, वह किसी जांच एजेंसी के अधिकारी द्वारा दायर शिकायत होती है, न कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति द्वारा।
कोर्ट ने यह भी माना कि अब जबकि आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा FIR दर्ज की जा चुकी है और आगे जांच संभव है, ऐसे में आरोपों के मेरिट्स पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने तीन अक्तूबर को गांधी परिवार और सात अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 403 (बेईमानी से संपत्ति का गबन), 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस नेता सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के साथ-साथ यंग इंडियन (वाईआई), डॉटैक्स मर्चेंडाइज लिमिटेड (Dotex Merchandise Ltd), डॉटैक्स प्रमोटर सुनील भंडारी और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) तथा अज्ञात अन्य को आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी लिखा है कि 2014 में शिकायत और समन आदेश होने के बावजूद CBI या किसी अन्य एजेंसी ने अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की इसके बावजूद ED ने 30 जून 2021 को ECIR दर्ज कर ली।
नेशनल हेराल्ड का मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत से उपजा है, जिसमें उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और गांधी परिवार के नियंत्रण वाली यंग इंडियन ऑफ इंडिया कंपनी पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।