... इनकी चमड़ी काफी मोटी होती है!
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से करने के मामले को ख़त्म करने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बंद करने की सलाह देते हुए टिप्पणी की कि सार्वजनिक जीवन में लोगों को ऐसे बयानों पर संवेदनशील होने की जरूरत नहीं है।
मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन के सिंह ने टिप्पणी की कि इस मामले की कारवाही बंद कर दी जानी चाहिए। शशि थरूर के वकील ने आज इस मामले पर सुनवाई टालने की मांग की। शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले को नॉन मिसलेनियस डे ( ऐसा दिन, जिस दिन इसपर लंबी सुनवाई हो सके) पर रखा जाए। इस पर जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि आप इस मामले को लेकर इतना संवेदनशील क्यों हैं? नौकरशाह, नेता और जजेज सभी एक ही ग्रुप से आते हैं, उनकी चमड़ी काफी मोटी होती है (sufficiently thicker skin)। आप चिंता मत कीजिए।
नौकरशाह, नेता और जजेज सभी एक ही ग्रुप से आते हैं, उनकी चमड़ी काफी मोटी होती है – जस्टिस एम एम सुंदरेश।
इसपर शिकायतकर्ता की एडवोकेट ने कहा कि माई लॉर्ड, सुनवाई तो होनी ही है। इस पर सहमति जताते हुए, कोर्ट ने इस मामले को ‘अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों’ से कम प्राथमिकता वाला बताते हुए सुनवाई को अगले हफ्ते के लिए टाल दिया। तबतक निचली में ट्रायल पर रोक जारी रहेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 अगस्त को शशि थरूर की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक वर्तमान प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी आरोप घृणित और निंदनीय हैं और इससे पार्टी, उसके सदस्यों और उसके पदाधिकारियों की छवि पर असर पड़ता है। कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस तरह की टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी और आरएसएस को बदनाम करने के समान है। बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने शशि थरूर की टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।