पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा के मार्ग पर होटल, ढाबा, फल और खान-पान की दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का निर्देश दिया था। बहुत आलोचना हुई, मामला सुप्रीम कोर्ट गया। कोर्ट ने यूपी सरकार के इस फरमान पर रोक लगा दिया था। इस बार सरकार दूसरे तरह के फरमान के साथ आई है। कांवड़ यात्रा के मार्ग में आने वाली दुकानों में दुकानदार का नाम के बजाय दुकान का नाम लिखना होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के नियम को लागू कर दिया है। इस संबंध में एफएसडीए (Food Safety and Drug Administration) विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि दुकानदारों को अपना नाम नहीं लिखना होगा। केवल दुकान का नाम ही लिखा जाएगा। हालांकि, क्यूआर कोड में दुकानदार से जुड़ी जानकारी होगी तो कांवड़ियों के लिए मददगार होगी। कहा जा रहा है कि यह निर्णय पारदर्शिता और जन कल्याण सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। निर्देश के अनुसार दुकानदार को अपनी दुकान पर क्यूआर कोड युक्त प्रपत्र लगाना होगा। इसमें क्यूआर कोड स्कैन करने पर दुकानदार का नाम, पता, लाइसेंस नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल की जानकारी मिलेगी। ऐसे में ग्राहक अपना भी फीडबैक दे सकेंगे।
यूपी सरकार के इस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के निर्देशों को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया और ऐसे सभी निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की। याचिका में कहा गया कि दुकानदारों को पहचान बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अपूर्वानंद ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य सरकार का यह नया निर्देश सुप्रीम कोर्ट के 22 जुलाई 2024 को दिए गए उस अंतरिम आदेश का उल्लंघन करता है। जिसमें कहा गया था कि खाद्य विक्रेताओं से उनका नाम और धार्मिक पहचान उजागर करने की बाध्यता खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत वैधानिक नहीं है और यह निजता के अधिकार का हनन है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के दुकानदारों को निशाना बनाने वाले सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग उपाय के कार्यान्वयन पर रोक लगाकर हस्तक्षेप करे। मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जबरदस्ती का एक पैटर्न चल रहा है, जिसमें परेशान करने वाले उदाहरण हैं जैसे कि दुकानदारों को पहचान सत्यापन के लिए दुकानदारों से पैंट उतारने के लिए कहा जाता है (यह जांचने के लिए कि क्या उनका खतना हुआ है)। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन के सिंह की बेंच 15 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगी।