जावरी टेंपल, खजुराहो/ फोटो : सौजन्य - Wikipedia Commons
खजुराहो के मंदिरों में एक मंदिर भगवान विष्णु का भी मंदिर है जिसे जावरी मंदिर के नाम से जानते हैं। उसमें भगवान विष्णु की सात फुट ऊँची प्रतिमा, खंडित अवस्था में है। सरकारों ने ध्यान नहीं दिया, किसी और ने नहीं सुना तो भगवान के एक भक्त राकेश दलाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
भक्त ने देश की अदालत से गुहार लगाई -माई लॉर्ड्स, आप ही कुछ कीजिए। इस मुद्दे पर बहुत विरोध-प्रदर्शन हुआ, संबंधित विभागों को ज्ञापन दिया गया, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं आया। यह मूर्ति मुगलों के आक्रमण के दौरान खंडित की गई थी और सरकार से कई बार अनुरोध करने के बावजूद आज तक उसकी मरम्मत नहीं की गई। औपनिवेशिक उपेक्षा और आज़ादी के बाद की निष्क्रियता के चलते 77 साल बाद भी मूर्ति खंडित अवस्था में ही है। … माई लॉर्ड्स, भगवान की मूर्ति खंडित होने से भक्त पूजा नहीं कर पा रहे हैं! आप भक्तों के पूजा के अधिकार ( Right to Worship) की रक्षा कीजिए, अब आपसे ही उम्मीद है।
कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया। कोर्ट को जब लगता है कि याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है या मामला अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर का है तो कोर्ट सुनवाई से इंकार कर सकता है। हालांकि, कोई भी मामला अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर का नहीं होता है। लेकिन कई बार जिस मामले को माई लॉर्ड्स नहीं सुनना चाहते, ऐसा बोलकर सुनने से मना कर देते हैं। चीफ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह कहते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया कि यह विषय अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है।
“अब तो आप स्वयं भगवान से ही प्रार्थना कीजिए। आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं, तो उन्हीं से प्रार्थना कीजिए। यह एक पुरातात्विक स्थल है और इसमें अनुमति ASI से लेनी होगी। हमें माफ करें।” – सीजेआई जस्टिस बी आर गवई
देश की एक बड़ी आबादी आज भी भगवान के भरोसे ही है माई लॉर्ड। आप चाहते तो बिना कुछ टिप्पणी किए भी इस याचिका को ख़ारिज कर सकते थे! इसमें कोई हिन्दू मुस्लिम विवाद का प्रश्न नहीं था। कोई प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट का उल्लंघन नहीं होना था। अदालतें तो पूजा के अधिकार की रक्षा के लिए अयोध्या से लेकर काशी, मथुरा और संभल तक दख़ल देती रही हैं! ये सब भी ASI के संरक्षण वाले स्थल हैं। इस मामले में एक भक्त को पूजा के अधिकार की रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करने को कहना न्यायसंगत नहीं लगा।
( सुप्रीम कोर्ट रिपोर्टर प्रभाकर मिश्रा के फेसबुक पेज से साभार )
2 thoughts on ““आप भक्त हैं तो भगवान विष्णु से ही जाकर कहिए” – सीजेआई गवई।”