CJI के बयान के बाद बनी थी CJP
कॉकरोच जनता पार्टी की गतिविधियों की जाँच होगी! सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी की गतिविधियों की जाँच की माँग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उसी याचिका में फ़र्ज़ी वकीलों, धोखाधड़ी से हासिल की गई क़ानून की डिग्री की जांच की भी मांग की गई है।
यही नहीं, याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अदालत में कही गई मौखिक टिप्पणियों ( observation ) के कथित कमर्शियल इस्तेमाल और उनसे पैसे कमाने के मकसद से उन्हें फैलाने के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
इस याचिका में कहा गया है कि CJI जस्टिस सूर्यकांत ने 15 मई को अदालतों की प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल, सीनियर एडवोकेट का दर्जा देने और कानूनी पेशे में प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स के गिरने को लेकर चिंता जताई थी। उसी दौरान उन्होंने “कॉकरोच” (तिलचट्टा) जैसे रूपक का इस्तेमाल किया था। CJI की उस टिप्पणी को चुन-चुनकर काटा गया, मीम बनाए गए, नकल की गई, कमर्शियल तौर पर फैलाया गया और संवैधानिक व प्रक्रियात्मक संदर्भ से अलग करके वायरल डिजिटल कंटेंट में बदल दिया गया।
याचिका में साफ किया गया है कि यह न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत सुरक्षित अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ नहीं है। इसके बजाय, इसमें जजों के मौखिक टिप्पणियों ( oral observations ) के संगठित कमर्शियल इस्तेमाल, ट्रेडमार्क-कमर्शियलाइज़ेशन, पैसे कमाने के लिए वायरल करने, मीम के जरिए तोड़-मरोड़ करने और एल्गोरिदम के जरिए डिजिटल कमोडिटी (बिकने वाली चीज़) बनाने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता एडवोकेट राजा चौधरी ने अदालत से मांग की है कि जजों की मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक उपयोग, ट्रेडमार्क, कमाई के उद्देश्य से प्रसार और अनधिकृत इस्तेमाल की जांच कर कार्रवाई की जाए। याचिका में विशेष रूप से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़ी गतिविधियों का जिक्र किया गया है। याचिका में कहा गया है कि निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित हैं। लेकिन कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का व्यावसायिक इस्तेमाल न्यायपालिका और न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे को कमजोर कर सकता है।
सीजीआई जस्टिस सूर्यकांत की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद ही कॉकरोच जनता पार्टी अस्तित्व में आई थी। अमेरिका में बैठे एक भारतीय युवक अभिजीत दीपके ने पहले पहले इंस्टाग्राम पर पेज बनाया। इंस्टाग्राम पर देखते देखते करोड़ों फॉलोअर बन गए थे। उसके बाद उसने कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट भी बना ली। सोशल मीडिया पर नीट पेपर लीक को लेकर मुहिम छेड़ दिया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग के लिए आंदोलन का ऐलान कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू किया और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका में उस कॉकरोच जनता पार्टी की गतिविधियों की जाँच की माँग की गई है। चूंकि कॉकरोच जनता पार्टी, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई थी। सरकार के एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। मतलब उसकी राय मांगी है।
अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। तबतक सरकार का जवाब आ गया होगा । सरकार की राय हां में ही होगी, इसकी पर्याप्त संभावना है। मतलब अब कॉकरोच जनता पार्टी की गतिविधियों की जाँच होगी। और इस बात की भी जाँच होगी कि CJI के कॉकरोच वाले बयान को किसने वायरल किया, किन लोगों ने उसका मीम बनाया! कहीं इसमें न्यायपालिका को बदनाम करने की कोई साजिश तो नहीं थी। और इसकी जांच, देश की प्रीमियर जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) करेगी।