Instagram DM में तारीफ अपराध नहीं - कर्नाटक HC
इंस्टाग्राम DM में क्लासमेट को pretty या Beautiful कहना अपराध नहीं है! कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि यह जेन z की भाषा है। इसके लिए मैसेज भेजने वाले को सज़ा नहीं दी जा सकती।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में नई पीढ़ी के युवाओं के बीच डिजिटल बातचीत के संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि निजी संदेश में किसी क्लासमेट की प्रशंसा करना अपराध नहीं है।
एक स्टूडेंट ने अपनी महिला क्लासमेट को इंस्टाग्राम डायरेक्ट मैसेज (डीएम) भेजकर उसे ब्यूटीफुल कहा था। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के निजी संदेश, जिनमें अक्सर जेन Z की भाषा का प्रयोग होता है, स्टूडेंट्स के बीच आम हैं और इन्हें अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
कर्नाटक में एक 19 वर्षीय छात्र ने अपनी 20 वर्षीय सहपाठी को इंस्टाग्राम पर निजी डायरेक्ट मैसेज (DM) भेजा। मैसेज में उसने लिखा था – “U kinda look so hot in light coloured clothes.” यह मैसेज प्राइवेट था और दोनों एक-दूसरे के क्लासमेट और फ्रेंड थे। रिकॉर्ड से पता चलता है कि लड़की ने पहले तो प्रशंसा का जवाब ‘थैंक्यू’ लिखकर दिया था। बाद में लड़की ने यह मैसेज अपने पिता को दिखाया, जो कर्नाटक में आईपीएस अधिकारी हैं। इसके बाद बेंगलुरु के अशोकनगर पुलिस स्टेशन में युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। युवक उस समय तमिलनाडु में अंडर-19 क्रिकेट टीम में शामिल होने की तैयारी कर रहा था। उसने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
युवक पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर कानूनी आरोप लगाए गए, जिनमें निजता के उल्लंघन के लिए धारा 66ई और धारा 66ए शामिल हैं। पुलिस ने उस पर विशेष रूप से ताक- झांक, पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे अपराधों का मामला दर्ज किया। लगभग दो साल तक चली जांच के दौरान पुलिस ने छात्र का लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त कर लिया था।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने के जज जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने स्टूडेंट के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने अपने फैसले में इस बात पर ज़ोर दिया कि बातचीत पूरी तरह से निजी थी और सार्वजनिक करने के लिए नहीं थी।
जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि यह चैट दो व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत थी और आधुनिक छात्रों में प्रचलित संचार शैली को दर्शाती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस्तेमाल की गई भाषा वर्तमान पीढ़ी के लिए सामान्य है और कहा, “यह चैट सार्वजनिक चैट नहीं है। यह दो व्यक्तियों के बीच की बातचीत है… इसमें इस्तेमाल की गई भाषा वही है जो आज के छात्र इस्तेमाल करते हैं। यह अपराध नहीं बन सकता।
हाईकोर्ट ने कथित अपराधों के कानूनी पहलुओं की गहन जांच की और पाया कि प्राइवेट मैसेज में की गई तारीफ अपने आप में पीछा करने या ताक-झांक करने की शर्तों को पूरा नहीं करती। जस्टिस नागप्रसन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक व्यवहार का कोई सबूत नहीं था और यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने DM के जवाब में थैंक्यू लिखा था, जिससे पता चलता है कि उस समय मैसेज को ग़लत नीयत से भेजे गए संदेश रूप में नहीं लिया गया था। कोर्ट ने आगे कहा, “यह इंस्टाग्राम पर एक डायरेक्ट मैसेज है। इसमें क्या गलत है? वह खुश होगी। इसीलिए मैंने ‘जेनरेशन Z की भाषा’ का जिक्र किया।”
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि केवल क्लासमेट होने से याचिकाकर्ता को शिकायतकर्ता की शक्ल-सूरत पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं मिल जाता। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से जांच जारी रखने का अनुरोध किया। हालांकि, कोर्ट ने इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की प्राइवेट बातचीत से पीछा करने या मानहानि का अपराध सिद्ध नहीं होता।
यही नहीं हाईकोर्ट ने चेतावनी भी दी कि ऐसे तुच्छ मामलों में आपराधिक कानून का सहारा लेने से युवाओं के जीवन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने एफआईआर और उससे संबंधित सभी कार्यवाही रद्द कर दी। साथ ही छात्र को अपना जीवन पुनः शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए, कोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह उसका मोबाइल फोन और लैपटॉप सहित जब्त की गई सभी सामग्री तुरंत लौटा दे।