आ बैल मुझे मार / BCI चेयरमैन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा NALSAR से जुड़े मामले में बुरी तरह फंस गए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के पक्ष में दिखने के चक्कर में उनकी खुद की कुर्सी ख़तरे में आ गई है। हाल ही में देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाने में कामयाब रही कॉकरोच जनता पार्टी ने मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा माँगने की मुहिम चलाने का संकेत दिया है।
NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने का विरोध किया। न CJI की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई और ना ही किसी सरकार की तरफ से कोई बयान आया। सबसे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा मामले में कूद पड़े। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लेटर हेड पर एक फरमान जारी हुआ कि NALSAR के बच्चों ने CJI का विरोध किया है इसलिए NALSAR से पास हुए स्टूडेंट्स का किसी भी बार में रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की चिट्ठी NALSAR पहुँचती उससे पहले ही हंगामा मच गया। NALSAR के स्टूडेंट्स को दंडित करने का BCI चेयरमैन के फैसले की ख़बर जंगल के आग की तरह पूरे देश में फैल गई। सोशल मीडिया का जमाना है, आजकल बात फैलने में देर कहां लगती है! BCI के इस फैसले पर सबसे पहले प्रतिक्रिया कॉकरोचों के तरफ से आई। कॉकरोच जनता पार्टी वाले अभिजीत दीपके ने ट्वीट किया – Time for Manan Mishra isteefa do ! चेयरमैन साहब घबरा गए।
घबराना स्वाभाविक था, कॉकरोच जनता पार्टी ने अभी अभी तो इस्तीफा लिया था। शाम होते होते बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से दूसरी दूसरी चिट्ठी जारी हुई। चिट्ठी का मजमून था -पहली चिट्ठी का लिखा पढ़ा माफ ! किसी स्टूडेंट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे अपनी जीत बताया। पता नहीं, ‘टाइम फॉर इस्तीफा दो!’ का उनका इरादा बदला या नहीं। लेकिन बात और विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। सुबह जब सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई शुरू हुई, एक सीनियर एडवोकेट ने मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने बार काउंसिल ऑफ इंडिया वाली चिठ्ठी की शिकायत कर दी। चीफ जस्टिस नाराज हो गए।
यह छात्रों और मेरे बीच का मामला है। वे कौन होते हैं इस मुद्दे को उठाने वाले? BCI की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है। छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है – CJI जस्टिस सूर्यकांत।
उन्होंने कहा कि यह तो यह छात्रों और मेरे बीच का मामला है। वे कौन होते हैं इस मुद्दे को उठाने वाले? BCI की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है। छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल आदेश दिया कि किसी भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी या लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र या फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जवाब भी मांग लिया है कि आपने धमकी भरा पत्र क्यों लिखा ? BCI को दो हफ्ते में जवाब देना होगा।
अब थोड़ी सी जानकारी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के बारे में भी। बिहार के गोपालगंज के रहने वाले मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से BCI के चेयरमैन हैं। और बीजेपी से राज्यसभा सांसद भी हैं। वकीलों के मुद्दों के साथ साथ आजकल सरकार के पक्ष में भी अपनी बातों को प्रमुखता से रखते हैं। कई बार बीजेपी सांसद के रूप में कही गई उनकी बात बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के पद के अनुरूप नहीं होती है, इसलिए समय समय पर विरोध भी होता रहता है।
संबंधित वीडियो :
अब मामले की पृष्ठभूमि को जान लेते हैं! नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ ( NALSAR ), हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के एक बड़े समूह ने CJI जस्टिस सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। 450 से अधिक छात्रों ने NEET से जुड़े विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में CJI की टिप्पणियों का हवाला दिया था। छात्रों का आरोप था कि इन टिप्पणियों से युवाओं और प्रदर्शनकारियों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
मनन कुमार मिश्रा ने सफाई भी दी है कि बार काउंसिल का इरादा किसी स्टूडेंट को दंडित करने का नहीं है। और ये भी कि जरूरत पड़ी तो कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से बात भी करेंगे। इस तरफ उन्होंने इस विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की है। लेकिन मनन कुमार मिश्रा का विरोध करने वाले इस मौक़े को इतनी आसानी से जाने नहीं देना चाहेंगे!