
वन नेशन, वन इलेक्शन पर विचार के लिए 2023 में जो कमेटी बनी, उसमें सुभाष कश्यप जी का नाम भी शामिल था। मैंने फोन किया – ‘सर, आपसे मिलना है।’ वो समझ गए कि वन नेशन, वन इलेक्शन पर पूछूंगा। उन्होंने बस इतना कहा कि -‘आइए, मुझे भी अच्छा लगेगा।… हाँ, अपना कैमरा लेकर मत आइएगा।’
हमारे जैसे टीवी के पत्रकार बिना कैमरे के कहीं कम ही जाते हैं। लेकिन मैं बिना कैमरे के गया। मुझे उनसे मिलना था, क्योंकि पता नहीं बाद में कभी मिलना हो पाए या नहीं। उस समय सुभाष जी 94 साल के हो गए थे।
कोर्ट और संविधान से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के चलते उनसे अक्सर मिलना होता था। और सुभाष जी, किसी भी मामले पर ऐसे बताते थे जिसे सामने उनका कोई स्टूडेंट बैठा हो।.. सुभाष कश्यप जी इलाहाबाद से थे, उनको पता था कि मैं उसी यूनिवर्सिटी से पढ़ा हूँ तो विशेष स्नेह रखते थे। किसी मामले पर पूछने पर बताते थे कि ‘संविधान में तो ये लिखा है.. लेकिन मैं समझता हूं/ मेरा मानना है।’ मतलब कोई कन्फ्यूजन नहीं। संवैधानिक व्यवस्था और निजी राय बिल्कुल स्पष्टता के साथ बताते थे।
उस दिन वन नेशन, वन इलेक्शन पर बहुत बात हुई। लेकिन साथ ही ये भी कि हिदायत कि ‘आज मैं पत्रकार से बात नहीं कर रहा हूँ।’ उस दिन उन्होंने अपनी एक नई किताब भी दी थी। बहुत मुश्किल से उस पुस्तक पर ऑटोग्राफ दे पाए थे, हाथ बुरी तरह कांप रहे थे।
सुभाष जी ने इस मुलाकात में ढ़ेर सारी बातें बताई थीं। लेकिन मैंने कुछ रिपोर्ट नहीं किया था। क्योंकि उन्होंने कहा था कि आज मैं पत्रकार से बात नहीं कर रहा हूँ।

सुभाष कश्यप भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून और संसदीय प्रक्रियाओं के विशेषज्ञ माने जाते थे। उन्होंने 100 से अधिक पुस्तकें और 500 से ज्यादा शोध लेख लिखे। उन्हें सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वह नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में मानद शोध प्रोफेसर के रूप में जुड़े हुए थे। सुभाष कश्यप ने देश के संवैधानिक ढांचे को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग (National Commission to Review the Working of the Constitution) के सदस्य रहे और इसकी ड्राफ्टिंग व संपादकीय समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
डॉ. सुभाष कश्यप का गुरुवार को निधन हो गया है। उन्होंने 97 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। सुभाष जी को विनम्र श्रद्धांजलि।