CJI जस्टिस सूर्यकांत: स्टूडेंट्स की नाराजगी का सम्मान
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत ने NALSAR विवाद पर अपना पक्ष रखा है। CJI ने कहा है कि उन्होंने कभी हैदराबाद की नालसर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह का न्योता स्वीकार ही नहीं किया था। ऐसे में वहां दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उनका ये बयान यूनिवर्सिटी के छात्रों के प्रोटेस्ट के बाद आया है। छात्र दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को बतौर चीफ गेस्ट बुलाने को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे।
CJI जस्टिस सूर्यकांत के विरोध की शुरुआत NALSAR से हुई थी। पहले हैदराबाद के लॉ यूनिवर्सिटी NALSAR के स्टूडेंट्स ने दीक्षांत समारोह में CJI जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि में नहीं बुलाने को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखा था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के दख़ल के बाद मामला और भड़क गया है। NALSAR के बाद विरोध की चिंगारी नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) तक पहुंच गई है।
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
इस बीच ख़बर है कि 22 अगस्त को आयोजित हो रहे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के आगामी दीक्षांत समारोह में CJI जस्टिस सूर्यकांत की जगह टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी. एस. प्रमेश मुख्य अतिथि होंगे। इससे पहले जस्टिस सूर्यकांत को समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया था।
पहले नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के विरोध की बात कर लेते हैं। NLSIU के 2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों और शिक्षकों के साथ समर्थन जताते हुए कहा है कि दीक्षांत समारोह किसी भी छात्र के अकादमिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे समारोह में उन उच्च पदस्थ लोगों को आमंत्रित करना, जिन्होंने छात्रों के प्रति सार्वजनिक रूप से कथित तौर पर तिरस्कारपूर्ण और अपमानजनक रवैया अपनाया हो, छात्रों के लिए अपमानजनक है और उनके संघर्षों का मज़ाक उड़ाने जैसा है।
छात्रों ने कहा कि वे मनन कुमार मिश्रा के NLSIU के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर इसलिए आपत्ति जताते हैं क्योंकि उन्होंने NALSAR प्रकरण में अपने आचरण की जिम्मेदारी नहीं ली है। छात्रों ने NALSAR के उस अनुरोध का भी समर्थन किया है जिसमें वहां के दीक्षांत समारोह के लिए CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
NLSIU समुदाय ने BCI से NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि BCI ने छात्रों और शिक्षकों से जुड़े एक प्रतिनिधित्व के मामले में उनकी पहचान करने के निर्देश देकर उनके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप करने की कोशिश की।
छात्रों ने BCI के आधिकारिक लेटरहेड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाया है। उन्होंने BCI से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि चेयरमैन द्वारा BCI के आधिकारिक लेटरहेड के इस्तेमाल के लिए क्या प्रोटोकॉल है।
NLSIU के छात्रों ने आरोप लगाया कि BCI की कार्रवाई Advocates Act, 1961 के तहत उसे प्राप्त अधिकारों की सीमा से बाहर थी। साथ ही उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप बताया।
छात्रों ने BCI चेयरमैन की ओर से की गई कथित राजनीतिक टिप्पणियों के पैटर्न पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस तरह के आचरण से कानूनी पेशे में BCI के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा है कि युवा वकील और देश के नागरिक होने के नाते वे एक बेहतर BCI की अपेक्षा करते हैं।
हालांकि, BCI ने बाद में NALSAR के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही बंद कर दी थी। इसके बावजूद NLSIU के छात्रों का कहना है कि किसी वैधानिक संस्था द्वारा इस तरह की कार्यवाही शुरू किया जाना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
छात्रों ने कहा कि उनका बयान इस मामले में स्थिति को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
अब बात टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में मुख्य अतिथि की। 22 अगस्त को आयोजित हो रहे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के 86वां दीक्षांत समारोह में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि होना था। लेकिन अब उनकी जगह टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी. एस. प्रमेश मुख्य अतिथि होंगे।
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TISS का दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को होना था, लेकिन कार्यक्रम से महज दो दिन पहले इसे स्थगित कर दिया गया था।
संस्थान ने उस समय कहा था कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण टालना पड़ रहा है। संस्थान ने हालांकि इन परिस्थितियों का विस्तृत खुलासा नहीं किया था। छात्रों और अधिकारियों की ओर से यह बात सामने आई थी कि CJI की प्रस्तावित यात्रा को लेकर संभावित विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं थीं। TISS ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समारोह आयोजित करने से छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों, गणमान्य अतिथियों और अन्य लोगों की सुरक्षा तथा परिसर के सामान्य वातावरण पर असर पड़ सकता था।
TISS के दीक्षांत समारोह की तारीख़ दोबारा घोषणा हुई तो चीफ गेस्ट का नाम बदला हुआ था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस वजह से CJI की जगह चीफ गेस्ट डॉ. सी. एस. प्रमेश मुख्य अतिथि बने हैं। CJI ने खुद कार्यक्रम में आने से मना कर दिया था या संस्थान ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए यह फैसला किया है।
NALSAR के फाइनल इयर के स्टूडेंट्स ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत का विरोध किया था। जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्र लिखकर कहा था कि बार काउंसिल में उन छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। हालांकि बाद में BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया था और बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के स्टूडेंट्स से माफ़ी भी मांगी थी। लेकिन विवाद फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।