CJP की सभी शर्तें पूरी ! सभी FIR रद्द , 5 सितंबर का प्रोटेस्ट रद्द !
NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जुलाई में हुए देशव्यापी छात्र प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों को लेकर देशभर में दर्ज FIR और आपराधिक मामलों को बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह कदम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उठाया।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदर्शन में bona fide तरीके से शामिल हुए युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह उचित मामला है, जिसमें अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार ने खुद किया FIR रद्द करने का अनुरोध
इस मामले में अहम बात यह रही कि केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा असम की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने का अनुरोध किया था। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार पहले CJP नेतृत्व से किए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि दोनों पक्ष अगर आपसी विश्वास के साथ बातचीत करें तो विवाद को सुलझाया जा सकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा ‘We are not enemies यानी हम दुश्मन नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार के रुख की सराहना की और दोनों पक्षों के बीच बने समाधान के रास्ते पर संतोष जताया।
5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं होगा
CJP ने सरकार पर अपने पहले के आश्वासनों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च का ऐलान किया था। प्रदर्शन में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की जा रही थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के आश्वासन के बाद CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कोर्ट को बताया कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने मार्च वापस लेने का निर्णय किया है।
आपराधिक छवि वाले प्रदर्शकारियों के खिलाफ दर्ज होगी नई FIR
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है। पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल 2,873 आपराधिक छवि लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने अनुमति दे दी है। पुलिस के अनुसार इन लोगों के गंभीर आपराधिक antecedents हैं। ऐसे मामलों में हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों का उल्लेख किया गया है।
सम्बंधित ख़बर यहाँ है: जंतर मंतर प्रोटेस्ट मामला, सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अर्जी : माई लॉर्ड, आप ही रद्द कर दीजिए FIR
इसके अलावा, केंद्र ने NEET विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के अपने आश्वासन को भी दोहराया है। सरकार ने इसकी प्रक्रिया तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है और सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। दीपके ने कोर्ट के फैसले को सच्चा न्याय बताते हुए कहा कि यह फैसला उन सभी छात्रों और परिवारों की जीत है, जिन्होंने NEET मुद्दे पर आवाज़ उठाई थी।