मज़बूत शासकों को चुनौती देने वालों को विरोध की क़ीमत चुकानी ही पड़ती है। चाहे वो राजतंत्र हो या लोकतंत्र! क्योंकि सत्ता का अपना चरित्र होता है, सत्ता को विरोध का स्वर पसंद नहीं होता। जंतर मंतर को मौन करने की कोशिश हो रही है। लेकिन जंतर मंतर मौन नहीं हो सकता!