न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल !
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ की गई शिकायतों के मामले में CJI जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस शर्मा से शिकायतों पर उनका जवाब मांगा है।
जस्टिस मेहता ने पिछले तीन हफ्तों में तीन पत्र लिखकर जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को राजस्थान से बाहर ट्रांसफर करने और हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने की मांग की थी। जस्टिस मेहता ने यह भी सवाल उठाया था कि उनकी बार-बार की गई मांगों पर CJI की ओर से अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जस्टिस मेहता स्वयं राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े रहे हैं। उन्होंने जस्टिस शर्मा पर नेतृत्व क्षमता की कमी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट के न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कुप्रबंधन और कथित अनियमितताओं की शिकायत की है।
मीडिया में आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर तय नहीं होगा मामला: CJI
CJI सूर्यकांत ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया है कि इस मामले का समाधान केवल स्थापित प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट किसी जज के खिलाफ दूसरे जज की शिकायत को मीडिया में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर तय नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट किसी जज के खिलाफ दूसरे जज की शिकायत को मीडिया में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर तय नहीं कर सकता – CJI जस्टिस सूर्यकांत।
CJI ने बुधवार को इस संबंध में एक सार्वजनिक बयान भी जारी किया। उन्होंने कहा कि किसी जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। संबंधित जज को पहले अपना पक्ष रखने का निष्पक्ष अवसर दिया जाना जरूरी है।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल आरोप लगाए जाने से यह नहीं माना जा सकता कि संबंधित जज के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं।
जस्टिस शर्मा से मांगा गया जवाब
CJI सूर्यकांत ने बताया कि जस्टिस मेहता के पत्र मिलने के बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से जवाब मांगा है। जस्टिस मेहता की शिकायतों में जस्टिस शर्मा पर “स्पष्ट रूप से पक्षपात”करने के सबूत होने का भी दावा किया गया है। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जस्टिस मेहता की शिकायतों की फिलहाल जांच की जा रही है। CJI सूर्यकांत इस समय तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जर्मनी में हैं। वहीं से उन्होंने इस मामले में स्थिति स्पष्ट की है।
क्या है जजों के खिलाफ शिकायत की स्थापित प्रक्रिया?
CJI के बयान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी जज के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के लिए स्थापित व्यवस्था इन-हाउस प्रक्रिया है। यदि CJI को संबंधित जज का जवाब संतोषजनक नहीं लगता और उन्हें लगता है कि लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं कि उनकी विस्तृत जांच जरूरी है, तो वह जजों की एक इन-हाउस कमेटी गठित कर सकते हैं। इस कमेटी में न्यायाधीश शामिल होते हैं और वह आरोपों की आगे जांच करती है।
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फिलहाल जस्टिस संदीप मेहता की शिकायतों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। CJI ने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से जवाब मांगा है और शिकायतों की जांच की जा रही है। इसलिए शिकायतों में लगाए गए आरोपों को इस स्तर पर सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। आगे की कार्रवाई जस्टिस शर्मा के जवाब और स्थापित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।