बुजुर्गों के संरक्षण का कानून / फ़ोटो AI
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल केवल पारिवारिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनन एक दायित्व भी है। इसी उद्देश्य से संसद ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 ( Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) बनाया। यह कानून वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और उनके जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।
• इस कानून में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति को वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen) माना गया है।
बच्चों की क्या जिम्मेदारी है?
अधिनियम की धारा 4 के तहत ऐसा वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता जो अपनी आय या अपनी संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग कर सकता है।
इसमें माता-पिता या दादा-दादी अपने वयस्क बच्चों के खिलाफ आवेदन कर सकते हैं। वहीं, यदि कोई वरिष्ठ नागरिक संतानहीन है, तो कानून में निर्धारित परिस्थितियों में वह अपने ऐसे रिश्तेदार से भरण-पोषण मांग सकता है जो उसकी संपत्ति का उत्तराधिकारी हो सकता है।
कानून का उद्देश्य केवल भोजन या पैसे की व्यवस्था करना नहीं है। बच्चों या संबंधित रिश्तेदार की जिम्मेदारी इस हद तक है कि माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक सामान्य जीवन जी सकें।
भरण-पोषण के लिए कहां आवेदन किया जा सकता है?
इस कानून के तहत Maintenance Tribunal यानी भरण-पोषण अधिकरण की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकारों को प्रत्येक उप-मंडल के लिये भरण-पोषण अधिकरण स्थापित करने की आवश्यकता है, जो वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता द्वारा या उनकी ओर से दायर भरण-पोषण के दावों पर निर्णय लेने और निर्णय करने के लिये सशक्त होंगे।
माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक स्वयं आवेदन कर सकते हैं। यदि वह आवेदन करने में असमर्थ हैं तो उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति या संगठन भी आवेदन कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में अधिकरण स्वयं भी मामले का संज्ञान ले सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश भी कर सकता है।
क्या अधिकरण हर महीने भरण-पोषण का आदेश दे सकता है?
कानून की धारा 9 के तहत अधिकरण भरण-पोषण के लिए मासिक राशि का आदेश दे सकता है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है।
राज्य सरकारों को इस कानून के तहत अधिकरण और अपीलीय अधिकरण की व्यवस्था करनी होती है। कानून में अपील का भी प्रावधान है।
संपत्ति देने के बाद बच्चे देखभाल नहीं करें तो?
इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण धाराओं में से एक धारा 23 है।यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने अपनी संपत्ति इस शर्त पर किसी व्यक्ति को हस्तांतरित की कि वह व्यक्ति उसकी बुनियादी जरूरतों और शारीरिक आवश्यकताओं की देखभाल करेगा, लेकिन बाद में वह व्यक्ति ऐसा करने से इनकार कर देता है या विफल रहता है, तो वरिष्ठ नागरिक कुछ परिस्थितियों में उस संपत्ति के हस्तांतरण को रद्द कराने की मांग कर सकता है। यानी संपत्ति देकर माता-पिता को बेसहारा छोड़ देना कानून की नजर में गंभीर मामला हो सकता है।
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वरिष्ठ नागरिक को छोड़ देना भी अपराध
कानून वरिष्ठ नागरिकों को जानबूझकर छोड़ देने यानी abandonment के खिलाफ भी प्रावधान करता है। धारा 24 वरिष्ठ नागरिक को किसी स्थान पर छोड़कर जाने की स्थिति को अपराध के रूप में संबोधित करती है।
केवल पैसे की जिम्मेदारी नहीं
यह कानून वरिष्ठ नागरिकों के व्यापक कल्याण की बात करता है। इसमें वृद्धाश्रमों की स्थापना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए चिकित्सा सहायता, जागरूकता और उनके जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान भी हैं।
कानून में कौन-कौन से महत्वपूर्ण प्रावधान हैं?
धारा 4 – माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का अधिकार
धारा 5 – भरण-पोषण के लिए आवेदन की प्रक्रिया।
धारा 7 – Maintenance Tribunal का गठन।
धारा 9 – भरण-पोषण का आदेश।
धारा 15-16 – Appellate Tribunal और अपील का प्रावधान।
धारा 18 – Maintenance Officer की व्यवस्था
धारा 19 – वृद्धाश्रमों की स्थापना।
धारा 20 – वरिष्ठ नागरिकों के लिए चिकित्सा सहायता
धारा 23 – कुछ परिस्थितियों में संपत्ति के हस्तांतरण को निरस्त करने का प्रावधान
धारा 24 – वरिष्ठ नागरिक को छोड़ देने के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान।
धारा 27 – कुछ मामलों में सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक।
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माता-पिता की देखभाल केवल संस्कार का विषय नहीं है, कानून भी उन्हें सुरक्षा देता है। यदि कोई बुजुर्ग अपनी आय या संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है और उसके बच्चे या संबंधित रिश्तेदार उसकी देखभाल नहीं करते, तो Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत कानूनी उपाय अपना सकता है।