कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। उन्होंने देश भर के लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि हम सोमवार को भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।
राहुल गाँधी ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, सिविल सोसाइटी और लोगों का सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस के मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि जो भी लोग संविधान में भरोसा रखते हैं, संविधान के साथ खड़े हैं, वो सभी लोग कल हमारे साथ चलेंगे। उन्होंने कहा कि हम कल एक राजनीतिक पार्टी, व्यक्ति विशेष, पुरुष-महिला, देश की अलग-अलग राज्यों के निवासी, जाति-वर्ग के तौर पर नहीं, बल्कि भारत के नागरिक के रूप में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। इस मार्च में INDIA ब्लॉक के कई नेताओं सहित सिविल सोसाइटी के लोगों के शामिल होने की संभावना है।
सोशल मीडिया पर शेयर पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा है कि , ‘हम सभी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के पास जाएंगे और उनको देश की तरफ से एक ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में हमारी मांग है कि वोट चोरी को रोका जाए, SIR को खत्म किया जाए, EVM को हटाया जाए और CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
इस बीच ख़बर है कि CJI जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कांग्रेस के नेताओं से मिलने की माँग ठुकरा दी है। राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने CJI को पत्र लिखकर SIR के मुद्दे पर उनसे मिलने का समय माँगा था। बार एंड बेंच ने रिपोर्ट किया है कि सूत्रों के मुताबिक (CJI के ऑफिस से अन ऑफिशियल स्टेटमेंट ) कांग्रेस के नेताओं से नहीं मिलने के पीछे निम्नलिखित कारण हैं:
1. जिन मसलों पर कांग्रेस नेता CJI से चर्चा करना चाहते हैं वो मुद्दे पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
2. संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट सरकार के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अदालत अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में दखल नहीं दे सकती।
3. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की छूट मिली हुई है। मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है।
4. मंगलवार को इसी तरह के मामलों पर सुनवाई होनी है। यदि नेता ऐसी कोई याचिका दायर करते हैं, तो उस पर भी उन्हीं मामलों के साथ सुनवाई हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि CJI सूर्यकांत ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च को लेकर कोई राय व्यक्त नहीं की है, क्योंकि उन्हें संबोधित पत्र में इस मार्च की अनुमति नहीं मांगी गई थी।