देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं और अदालत के भीतर क्या कहा जा रहा है। CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस पार्टी, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए।
हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता’: CJI जस्टिस सूर्यकांत
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के परिसर में किसी राजनीतिक जुलूस से जुड़ी ऐसी स्थिति पैदा होना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भाटिया ने न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कथित कोशिशों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते।
इस पर CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता।”जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अदालत किसी अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठी है। उसे पता है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं और अदालत में क्या कहा जा रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इन घटनाक्रमों से अनजान नहीं है।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के मार्च से जुड़ा है मामला
यह मामला 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से जुड़ा है। विपक्षी नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर अदालत पहुंचे थे।
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन हुए हैं। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए घटनाक्रम को लेकर याचिका दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग
याचिका में अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, न्यायिक व्यवस्था में बाधा डालने के आरोपों को लेकर संबंधित नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग भी की गई है।
सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने बेंच को बताया कि 200 से अधिक वकीलों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ज्ञापन में 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई घटना को लेकर चिंता जताई गई है।
गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार को कथित तौर पर धक्का दिया गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
उन्होंने बेंच से उस दिन की सुप्रीम कोर्ट परिसर की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया। भाटिया ने कहा कि याचिका में इस संबंध में अंतरिम राहत की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के मार्च के दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से मांगा जवाब
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा, कांग्रेस पार्टी, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने संबंधित पक्षों को दोषी ठहरा दिया है। यह मामले में उनका पक्ष जानने की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के अगले कदम पर नजर रहेगी। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग तथा अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।