न्यायपालिका की शुचिता का सवाल !
सुप्रीम कोर्ट में नोएडा की डीएम मेधा रूपम के मामले की सुनवाई को लेकर पहले से ही कई सवाल थे। अब एक नया विवाद सामने आया है। मेधा रूपम के मामला की सुनवाई करने वाली बेंच के जज जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे का चुनाव आयोग से संबंध है। जस्टिस शर्मा का बेटा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग स्टैंडिंग काउंसिल है।
आजकल दो ही अधिकारी चर्चा में हैं। एक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दूसरी नोएडा की डीएम मेधा रूपम। दोनों क्यों चर्चा में हैं यह आपको पता है। विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। ज्ञानेश कुमार जी पर चुनाव आयोग को मनमाने ढंग से चलाने का आरोप है। और मेधा रूपम पर मनमाने ढंग से एक स्टूडेंट के खिलाफ NSA लगाने का आरोप है।संयोग से दोनों पिता पुत्री हैं। दोनों अपनी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इनकी लड़ाई की आंच चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा के साथ साथ देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा तक पहुंच गई है।
ज्ञानेश कुमार के मामले में पूरे देश को पता चल चुका है। इसलिए उनके मामले में यहाँ विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। हम सीधे मिली भगत वाली बता पर आते हैं। नोएडा में श्रमिकों के प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा पर NSA लगाने से जुड़े मामले में नोएडा DM मेधा रूपम को राहत मिलने की खबर तो आपको पता चल गई थी कि कैसे बेंच बदला गया! रोस्टर के मुताबिक मेधा रूपम की याचिका पर जस्टिस नागरत्ना की बेंच को सुनवाई करनी थी। लेकिन मामला चला गया जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने और मेधा रूपम की राहत भी मिल गई। मेधा रूपम पर लगे 5 लाख के जुर्माने और नकारात्मक टिप्पणी दोनों पर रोक लग गई।
क्या है नया ट्विस्ट
अब आइए खुलासे की बात करते हैं कि इस मामले में नया खुलासा क्या है ? प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मेधा रूपम के मामले की सुनवाई करने वाली बेंच की अगुवाई करने वाले जज जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बड़े बेटे जो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते है, चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जस्टिस शर्मा के बेटे, जिन्होंने 2017 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया था, चुनाव आयोग ( ECI ) के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। वह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग के भी स्टैंडिंग काउंसिल हैं। जस्टिस शर्मा के छोटे बेटे ने 2020 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया था और वह मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। नोएडा की डीएम, मेधा रूपम, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। यह बात सबको पता है।
गौरतलब है क जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा उस दो सदस्यीय बेंच में भी थे, जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की थी। आपको यह पता ही होगा कि इस मामले को संविधान पीठ में भेजा जायेगा या नहीं इसे लेकर दोनों जजों में मतभेद हो गया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता नहीं चाहते थे कि इसे संविधान पीठ को भेजा जाए। उनके मुताबकि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में दोष है। जबकि जस्टिस शर्मा का मत था कि इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ द्वारा की जानी चाहिए, और अंततः मामला संविधान पीठ को भेजना पड़ा। मामला लटका गया। जिस दिन यह फैसला आया उसी दिन संयोग से उसी दिन नोएडा की DM मेधा रूपम के मामले में भी फैसला आया था।
कहाँ है न्यायिक सुचिता
जब किसी जज का बेटा चुनाव आयोग के पैनल में वकील के रूप में नियुक्त हो, तो चुनाव आयोग से जुड़े मामले और चुनाव आयुक्त की बेटी से जुड़े मामले में निष्पक्षता को लेकर सवाल तो उठना लाजमी है। सवाल यह है कि क्या किसी जज से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वह किसी ऐसी संस्था के खिलाफ फैसला दे, जिस संस्था के साथ उसके बच्चे का पेशेवर भविष्य जुड़ा हुआ हो?
कुछ दिन पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के मामले में ऐसा ही सवाल खड़ा हुआ था। शराब नीति घोटाले से जुड़े मामले में केजरीवाल ने हाईकोर्ट की जज पर ऐसा ही आरोप लगाया था। कथित शराब नीति घोटाले में निचली अदालत से केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के नेताओं को क्लीन चिट मिली। केजरीवाल ने उस बेंच के सामने सुनवाई से इंकार कर दिया था। क्योंकि CBI की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई करने वाली जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का बेटा, CBI का वकील था।
Related Video :
कहते हैं कि न्याय केवल होना ही काफी नहीं है, न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मामले में इसी तर्ज पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा था कि निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। दुर्भाग्य से न न्याय होते हुए दिखाई दे रहा और ना ही चुनाव आयोग निष्पक्ष दिखाई दे रहा है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की यह तस्वीर अच्छी नहीं है माई लॉर्ड। सब दिख रहा है, सब देख रहे हैं… साफ साफ.. स्पष्ट!!