अभिषेक उपाध्याय: एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की शरण में
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय से जुड़े कथित रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल कर यह बताने के लिए कहा कि रोड-रेज मामले में सोशल मीडिया प्लेटफार्म X से आरोपी पत्रकार के बारे में क्या जानकारी मांगी जा रही है। कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से दाखिल एक अर्जी पर यह निर्देश दिया। अर्जी में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा X को भेजे गए उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें पत्रकार के सोशल मीडिया खातों के बारे में जानकारी माांगी गई है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को उजागर करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद में रोड रेज का एक मामला दर्ज हुआ। गाजियाबाद पुलिस उस मामले की जाँच कर रही है। और उसी क्रम में गाजियाबाद पुलिस अभिषेक उपाध्याय के डिजिटल फुट प्रिंट की भी जांच करना चाहती है। इसलिए पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट X से उनका डिटेल मांगा है। अभिषेक उपाध्याय ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मामले की सुनवाई CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया कि पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट से कितनी व्यापक जानकारी मांगी है और उसका संबंधित FIR की जांच से क्या संबंध है?
कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को कहा है कि X से मांगी गई जानकारी संबंधित FIR या पत्रकार के खिलाफ पहले दर्ज किसी अन्य FIR की जांच के लिए किस उद्देश्य से आवश्यक है और साथ ही कोर्ट ने पुलिस को हिदायत भी दी है कि ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
अभिषेक उपाध्याय की दलील
अभिषेक उपाध्याय के वकील SCBA प्रेसिडेंट प्रदीप राय ने दलील दी कि UP Police का नोटिस बहुत व्यापक है। 18 अगस्त की कथित रोड-रेज घटना घटी। लेकिन पुलिस 1 जून से सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित जानकारी मांगी है। यही नहीं अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल डिवाइस की जानकारी तक मांगी गई है।
प्रदीप राय ने आशंका जताई कि इस तरह की जानकारी मांगने का इस्तेमाल पत्रकार के sources तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है। अभिषेक उपाध्याय की ओर से कोर्ट में कहा गया कि वह जांच में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
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सुनवाई के दौरान CJI ने Privacy को लेकर चिंता जताई। उन्होंने डिजिटल जानकारी जुटाने की सीमा और उससे जुड़े Privacy concerns पर सवाल उठाते हुए कहा कहा कि यदि जांच के दौरान पुलिस के हाथ कोई confidential information लगती है और उसे रिकॉर्ड पर लाया जाता है, तो इससे व्यक्ति की निजता प्रभावित हो सकती है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की सीमा और उसके लिए उचित guidelines क्या होनी चाहिए, इस पर विचार किया जाना जरूरी है।
UP पुलिस की दलील
UP पुलिस की अपनी दलील है। पुलिस ने दलील दी कि FIR की जांच जरूरी है। सरकार के वकील ने कहा कि याचिका मूल रूप से FIR रद्द करने की मांग कर रही है और रोड रेज मामले में शिकायतकर्ता की चोटों से संबंधित MLC रिपोर्ट भी मौजूद है, जिसके आधार पर जांच की आवश्यकता है।
बाक़ी बातें तो आपको पता हैं कि पिछले महीने इसी कथित रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक उपाध्याय का नया हलफनामा
इसके अलावा इस ख़बर में एक और अपडेट है कि अभिषेक उपाध्याय ने कोर्ट में दायर एक अन्य हलफनामे में ये भी आरोप लगाया है कि UP Police की एक टीम उनकी तलाश में, दिल्ली के पूर्व मेयर फरहाद सूरी के आवास में दाखिल हुई थी। अभिषेक ने कहा है कि यह बताता है कि उनके खिलाफ, यूपी पुलिस किस तरह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है, इसकी जाँच होनी चाहिए।
अभिषेक उपाध्याय का आरोप है कि उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण का खुलासा किया था इसलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है।
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