सुप्रीम कोर्ट/ जा जी ले अपनी ज़िंदगी
हत्या के दोषी एक 105 साल के व्यक्ति को उसके उम्र और स्वास्थ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी बाक़ी सज़ा माफ कर दी है। 1988 के हत्या मामले में दोषी 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में अंतरिम जमानत दी थी। कोर्ट ने रसिक मंडल की उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते आदेश दिया है कि उन्हें अब दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा। CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास की अवधि पूरी नहीं हुई हो, तब भी मंडल को दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की अत्यधिक उम्र को ध्यान में रखते हुए मामले को समाप्त किया जा रहा है। कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम कर दिया।
केस का बैकग्राउंड जान लेते हैं
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वर्ष 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को 1988 के हत्या मामले में वर्ष 1994 में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 74 वर्ष थी। दोषसिद्धि के बाद उन्होंने लंबे समय तक जेल में सजा काटी।
मंडल ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई।
वर्ष 2020 में जब मंडल की उम्र 99 वर्ष थी, उन्होंने अपनी अत्यधिक उम्र और उम्र संबंधी बीमारियों का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।
नोटिस के तीन साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंडल की उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ कोर्ट ने उस समय निर्देश दिया था कि मुकदमे की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तों के आधार पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।
7 जुलाई को एक अन्य आदेश में, CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता की उम्र 105 वर्ष से अधिक बताई गई है। हालांकि याचिकाकर्ता को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी है कि वह पूरी तरह से असहाय और अक्षम हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से पेश हो रहे एडवोकेट इस संबंध में निर्देश प्राप्त करें।’ अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार सप्ताह बाद का समय तय किया था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंडल की उम्र को देखते हुए मामले को अब बंद किया जा रहा है। अदालत ने उनकी शेष सजा, यदि कोई है, को माफ करते हुए 2024 में दी गई अंतरिम जमानत को पूर्ण और अंतिम कर दिया। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की सजा की अवधि तकनीकी रूप से पूरी नहीं हुई हो, उन्हें अब वापस हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
इस आदेश के साथ करीब 105 वर्ष की उम्र में रसिक चंद्र मंडल, जीवन के कुछ बचे खुचे दिन अब स्वतंत्र रूप से जी सकेंगे।