स्वतंत्र भारद्वाज : SC/ST Act में जमानत
जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी लड़की निशु आजाद के पिता के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाऊस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है।
SC-ST एक्ट से जुड़े मामला में कैसे मिली जमानत
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के जज, ASJ सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने अपने आदेश में लिखा है कि घटना 23 जून की है। और जिस जातिगत अपमान के आधार पर SC/ST एक्ट लगाया गया है, घटना के तत्काल बाद दर्ज FIR में इस जातिगत अपमान वाली बात नहीं लिखाई गई। यह आरोप पहली बार लगभग दस सप्ताह बाद, 4 सितंबर को सामने आया।
हालांकि जज ने यह स्पष्ट किया है कि केवल इस वजह से कि जातिगत अपमान वाला आरोप दस हफ्ते की देरी से लगाया गया है, उसे झूठा नहीं माना जा सकता। न ही इस स्टेज पर कोर्ट उसकी सत्यता का फैसला कर सकता है। लेकिन जमानत पर विचार करने के सीमित उद्देश्य से इस देरी पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि यह देखना होगा को दस हफ्ते की देरी का क्या स्पष्टीकरण दिया गया है ? और यह भी कि जिस अपमानजनक शब्द के आधार पर SC ST लगाया गया है, क्या वास्तव में वे शब्द कहे गए थे ? साथ ही ये भी कि आक्रामक पक्ष कौन था, झगड़े की शुरुआत किसने की ? इन सभी सवालों पर दोनों पक्ष अपने-अपने वीडियो के आधार पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इन प्रश्नों का निर्णय ट्रायल के दौरान होगा। और यह कहते हुए कोर्ट ने स्वतंत्र भरद्वाज को अंतरिम जमानत दे दी।
पटियाला हाऊस कोर्ट के जिस जज ने स्वतंत्र भरद्वाज को SC ST एक्ट में अंतरिम जमानत दी है, उसी जज ने यूट्यूबर अजीत भारती को SC ST एक्ट में अग्रिम जमानत देने से यह कहकर मना कर दिया था कि अजीत भारती के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया SC-ST का मामला बनता है। ऐसी स्थिति में इस एक्ट में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।
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कोर्ट ने अपने आदेश में और भी बातें कहीं हैं। निशु आज़ाद के पिता की तरफ से आरोप लगाया गया था कि उनके और उनकी नाबालिग बेटी को कई नंबरों से गंदे अश्लील मेसेजेज भेजे गए हैं, कोर्ट ने कहा कि इन मेसेजेज का संबंध अपूर्व भारद्वाज से नहीं जोड़ा जा सका है। कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को इस मामले से संबंधित किसी भी तरह की सामग्री पोस्ट या शेयर करने से रोक दिया है।
इस मामले से जुड़े दोनों पक्ष सोशल मीडिया पर खूब बयानबाजी कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि घटना से संबंधित जो भी तथ्य या सवाल तय किए जाने हैं, उनका निर्णय अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से या सोशल मीडिया पर।
कोर्ट ने अपने आदेश में हरियाणा के एक मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि रेप के एक आरोपी को जमानत मिलने पर उसका विजय जुलूस निकाला गया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। ..जमानत अदालत के भरोसे की अभिव्यक्ति है, यह कोई तमगा नहीं जिसे प्रदर्शित किया जाए।
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आचरण पर नजर रखी जाएगी
कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार में, एक्ट के तहत पीड़ित की सुरक्षा का कर्तव्य और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत आजादी की रक्षा का कर्तव्य, आवेदक को तीन सप्ताह के लिए कड़ी शर्तों पर अंतरिम जमानत पर रिहा करके ठीक ढंग से संतुलित किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान उसके आचरण पर नजर रखी जाएगी और उसके बाद नियमित जमानत के लिए उसकी याचिका पर विचार किया जाएगा। स्वतंत्र ने नियमित जमानत (Regular Bail) मांगी थी।
इससे पहले सोमवार (15 सितंबर) को कल कोर्ट को बताया गया कि भारद्वाज के खिलाफ SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट के तहत दो FIR दर्ज हैं। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई बंद कमरे (in-camera) में करने का फैसला किया।
स्वतंत्र भरद्वाज दिल्ली पुलिस ने 5 सितंबर बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और प्रधानमंत्री का आशीर्वाद होने के दावों वाला वीडियो वायरल होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी, आजाद समाज पार्टी और कांग्रेस नेताओं ने संसद मार्ग पुलिस थाने पर प्रदर्शन किया था और स्वतंत्र के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा लगाने की मांग की थी।
पुलिस ने बाद में मामले में एससी/एससी एक्ट की धारा जोड़ी और पाक्सो के तहत भी मामला दर्ज किया तथा स्वतंत्र को गिरफ्तार किया गया।
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एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने खुद यह दावा किया था कि उसने अपने हाथ के कड़े से निशू के पिता संजय आजाद पर हमला किया और सर फोड़ दिया। स्वतंत्र ने यह भी दावा किया कि संजय को 60 टांके आए थे।